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शायरी

बदलाव मंच अगस्त 16, 2020
मशहूर होने में न जाने कितना वक़्त लगता है, मग़रूर होने के लिए तो महज़ चंद मिनट काफ़ी है। *मशगूल* होने में न जाने कितना कुछ त्याग करना पड़ता है, म...Read More
शायरी शायरी Reviewed by बदलाव मंच on अगस्त 16, 2020 Rating: 5

जितेन्द्र विजयश्री शायरानें अंदाज में

बदलाव मंच अगस्त 09, 2020
बदलाव नियम है ज़िंदगी का, बदलाव दस्तूर है ज़िंदगी का। बदलाव न हो तो ऊब जाता है आदमी, बदलाव फ़ितूर है ज़िंदगी का।। ©®जितेन्द्र विजयश्...Read More
जितेन्द्र विजयश्री शायरानें अंदाज में जितेन्द्र विजयश्री शायरानें अंदाज में Reviewed by बदलाव मंच on अगस्त 09, 2020 Rating: 5

उसने कहा अपना डर इस बात का ,किसका करूं भरोसा डर इस बात का

बदलाव मंच अगस्त 09, 2020
मंच को नमन कुछ शेर आपके समक्ष प्रस्तुत उसने कहा अपना डर इस बात का किसका करूं भरोसा डर इस बात का वो कौन सा कहां का राज चाहता घर उ...Read More
उसने कहा अपना डर इस बात का ,किसका करूं भरोसा डर इस बात का उसने कहा अपना डर इस बात का ,किसका करूं भरोसा डर इस बात का Reviewed by बदलाव मंच on अगस्त 09, 2020 Rating: 5

इश्क़ की लौ में दिल का दिया जलाकर देखूँ सोचता हूँ मैं आज उसे हाथ लगाकर देखूँ।।

बदलाव मंच जुलाई 28, 2020
नज्म इश्क़ की लौ में दिल का दिया जलाकर देखूँ सोचता हूँ मैं आज उसे हाथ लगाकर देखूँ।। मुहब्बत की राहों का मुझे कोई खबर नही पर चाहत है की उससे द...Read More
इश्क़ की लौ में दिल का दिया जलाकर देखूँ सोचता हूँ मैं आज उसे हाथ लगाकर देखूँ।। इश्क़ की लौ में दिल का दिया जलाकर देखूँ सोचता हूँ मैं आज उसे हाथ लगाकर देखूँ।। Reviewed by बदलाव मंच on जुलाई 28, 2020 Rating: 5

कभी चाँदनी सी धवल कभी सुर्ख गुलाबों की लाली है ।उतरती है मुझ में चाँदनी सी सुकून शांति की कहानी है।।

बदलाव मंच जुलाई 28, 2020
कभी चाँदनी सी  धवल कभी सुर्ख गुलाबों की लाली है । उतरती है मुझ में चाँदनी सी सुकून शांति की कहानी है।। वह मेरी प्रेमिका मेरी...Read More
कभी चाँदनी सी धवल कभी सुर्ख गुलाबों की लाली है ।उतरती है मुझ में चाँदनी सी सुकून शांति की कहानी है।। कभी चाँदनी सी  धवल कभी सुर्ख गुलाबों की लाली है ।उतरती है मुझ में चाँदनी सी सुकून शांति की कहानी है।। Reviewed by बदलाव मंच on जुलाई 28, 2020 Rating: 5

क्या तुम मेरी मोहब्बत बनोगी

बदलाव मंच जुलाई 26, 2020
क्या तुम मेरी मोहब्बत बनोगी*,  या फिर यूँ ही तड़पता छोड़ दोगी*,  क्या तुम मुझे अपना गीत बनाओगी*,  या फिर मेरा सरगम तोड़ जाओगी*, ...Read More
क्या तुम मेरी मोहब्बत बनोगी क्या तुम मेरी मोहब्बत बनोगी Reviewed by बदलाव मंच on जुलाई 26, 2020 Rating: 5

अज़हर अहमद शायराना अंदाज़ में

बदलाव मंच जुलाई 25, 2020
1.कहा था मौत, कल मिलने आउंगा, सदियों बित गए, तुम्हे लेने आउंगा,  सुना हू यहां लोग, तुम्हे दुवाए ख़ूब देते है, माफ़ कर दोस्त - मै सिर्फ, तुम्...Read More
अज़हर अहमद शायराना अंदाज़ में अज़हर अहमद शायराना अंदाज़ में Reviewed by बदलाव मंच on जुलाई 25, 2020 Rating: 5
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