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प्रख्यात ग़ज़लकार /कवि मुमताज़ हसन जी की शानदार ग़ज़ल

बदलाव मंच अगस्त 22, 2020
ज़माना पैसे पे निसार हुआ , तमाम रिश्ता तार तार हुआ! कदम कदम पे कांटे बिछे हैं, चलना नंगे पांव दुश्वार हुआ! नफ़रत इंसानियत पर हावी हुई  देखकर म...Read More
प्रख्यात ग़ज़लकार /कवि मुमताज़ हसन जी की शानदार ग़ज़ल प्रख्यात ग़ज़लकार /कवि मुमताज़ हसन जी की शानदार ग़ज़ल Reviewed by बदलाव मंच on अगस्त 22, 2020 Rating: 5
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