शुक्रवार, 2 अप्रैल 2021

कल्पना गुप्ता/ रतन जी द्वारा# वफ़ा के बदले#

वफा के बदले क्यों किसीको वफा नहीं मिलती
जो खींचे मुझे अपनी और क्यों ऐसी हवा नहीं चलती।

रहते हो क्यों घिरे उदासी से हर रोज़ तुम
क्यों प्यार की लो अब अंदर तुम्हारे नहीं जलती ‌।

रास्ता वही राही वही साथी वही मंजिल वही
सांसो के सुर से जो निकले आवाज क्यों तुम्हें खलती।

तुम्हारी आंख में बसे रहते थे हम सितारों की तरह
दिल से फेंक दूर निकालते हो हर बात पर गलती।

माना कि तकाज़ा है उम्र का उसकी थकान का
दिल में है जो तेल उस दीपक की बत्ती क्यों नहीं बलती।

गाया करो तराना सुनाया करो अफसाना प्यार का
जी लो जिंदगी को पतंगे की तरह, उम्र है ढलती।

कल्पना गुप्ता/ रतन

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