बुधवार, 24 मार्च 2021

शशिलता पाण्डेय जी#वो पेंटिंग पर रचना#

🥀वो पेंटिंग🥀
**************
धरती के कैनवास पर, 
कुदरत ने तस्वीर उकेरी।
जगत की शोभा अति न्यारी।
भरा रंग उसमेँअनूठा अद्भुत,
तरुवर-पुष्प से धरा सौंदर्यपूरित।
रंगों से सजाया रंग-बिरंगे मौसम,
पतझड़ सावन शीत-बसन्त ग्रीष्म।
प्राकृतिक हर छटा बिखेरी,
कहीं बहते निर्झर की स्वरलहरी।
जहाँ पड़ती सूरज की किरणें सुनहरी,
धरा-पटल लगती पेड़-पौधों से हरी-भरी।
कुदरत निर्मित हर तस्वीर अनोखी,
 धरा के कैनवास की वो पेंटिंग जिसने देखी।
हुआ प्राकृतिक छटा का दीवाना,
ये चित्रकार कोई अद्भुत अनजाना।
रंग- बिरंगे सुन्दर पुष्पों से धरा सुसज्जित,
कभी बसन्त में लाल गुलमोहर से रक्तरंजित।
ये अनोखे रंग-बिरंगे प्राकृतिक चित्र,
देते नैनो को सुकून करते मन को तृप्त।
अनोखी अद्भुत कुदरत की जादूगरी,
सजी खूबसूरत तस्वीर से वसुन्धरा निखरी।
दिखती कहीं खूबसूरत हसीन वादियाँ,
कहीं अविरल बहती स्वर लहरी में नदियाँ।
 कहीं प्रखर अंशुमान सिंदूरी आभा-पूरित,
ये दृश्य अप्रतिम विहंगम परिलक्षित।
लदे-फदे से वृक्ष खड़े पुष्पज के अलंकारों से,
कहीं मौसम का रूप अनूठा बसंती बहारो से।
**********************************
स्वररचित और मौलिक
सर्वाधिकार सुरक्षित
कवयित्री:-शशिलता पाण्डेय
बलिया( उत्तर प्रदेश)

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें