रविवार, 21 फ़रवरी 2021

छंद#प्रकाश कुमार मधुबनी'चंदन' जी द्वारा खूबसूरत रचना#


स्वरचित रचना
स्वरचित छंद

जिसने ये तन दिया मेरे लिए है हर क्षण जिया।
उस माता पिता को क्यों ना झुक के प्रणाम करू।
जिसके बिना कोई घर नही और हो यह धर नही।
उनके कहे पे क्यों ना मैं हर कठिन काम करू।
जिनके कर्ज को अभी तक ईश्वर भी ना चुका पाए
फिर क्यों ना मैं उनके शौर्यता का बखान करू
जिन्होने है चलना सिखाया, सदा ही बढना सिखाया।
उस माता पिता का क्यों ना मैं नित  गुणगान करू।

*प्रकाश कुमार मधुबनी'चंदन'*

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