रविवार, 21 फ़रवरी 2021

अनन्तराम चौबे अनन्त जी द्वारा विषय जन्मदिन सालगिरह का दिखावा पर खूबसूरत रचना#

जन्मदिन सालगिरह का दिखावा (लेख)
 रेलवे की 40 वर्षों की सेवा के बाद रिटायर होने के बाद मैंने साहित्य सेवा का लक्ष्य बनाया और उसी राह पर चल रहा हूं मंजिल का तो पता नहीं है जहां तक पहुंच गया हूं उससे संतुष्ट हूं । 50 वर्षों से साहित्य सेवा भी कर रहा हूं ।
 अब साहित्य सेवा करते हुए सम्मान मिल रहे हैं ये तो अच्छी बात है किसी को अच्छा न लगे ये उनकी सोच है ऐसे कुछ लोग  टोकते भी है रोड़े भी अटकाते है परंतु इससे भ्रमित न होकर अपनी साहित्य सेवा जारी है जैसे अर्जुन का लक्ष्य मछली की आंख भेदन करना था और उन्होंने किया क्योंकि उन्होंने अपनी एकाग्रता , ध्यान को सिर्फ आंख पर ही केन्द्रित किया था । फिर भी न मैं अर्जुन हूं  न उनकी कल्पना कर सकता हूं ।
  इसी फरवरी में मैं 70 वें वर्ष में प्रवेश करूंगा मगर मैंने अपना जन्मदिन या शादी की सालगिरह कभी नहीं मनाया न कभी सोचा 4/5 वर्षों से वाट्सएप मंचों से जुड़ा हूं कभी किसी मंच में नही बताया न मुझे शौक है । रही बात  किसी को बधाई शुभकामनाएं नहीं देता  हां मंचों में किसी को नहीं देता मंचों में प्रतिदिन किसी न किसी का जन्मदिन सालगिरह आता ही रहता है  मैं 100/125/ मंचों से व इससे ज्यादा पर्सनल लोगों से जुड़ा हूं  रोज यदि सब मंचों में बधाई शुभकामनाएं देता रहूं फिर तो साहित्य सेवा कर ही नही पाऊंगा कुछ पाने के लिए कुछ त्याग भी करना पड़ता है ऐसा बुजुर्गो से सुना है । 100 में से 99 काम सही करो और एक ग़लत हो जाये तो लोग बुराई करते ही हैं ।
मंचों पर लोग अपना जन्मदिन, सालगिरह तो डालते ही है  परिवार रिश्तेदारों के भी डालते हैं यदि समझदार हो तो ये सब साहित्य मंचों में नहीं डालना चाहिए मंच वाधित होते हैं दिन भर यही चलता रहता है कोई बुरा न मान जाएं मजबूरी में भेजते हैं अभी पिछले माह 2 जनवरी 2021 को मेरे बड़े भाई का स्वर्गवास हुआ है  15/16 दिन गांव में भी रहा शोक के समय परिवार का साथ दिया साथ में रहा विधिवत सब कार्य किये मगर मैंने इस दुख की खबर मंचों में नहीं डाली क्योंकि ये मेरा पारिवारिक  कार्यक्रम था ।
 हां परिवार में शोक होते हुए साहित्य कार्यक्रम जारी रखा भाई की मृत्यु पर कविता भी लिखी दिनांक 12/1/2021को स्वर्ण आभा पेपर श्रीगंगानगर राजस्थान में प्रकाशित भी हुई मंचों में आनलाइन कवि सम्मेलन किये विषय प्रतियोगिताओं में कविता लिखकर हिस्सा लिया प्रथम द्वितीय तृतीय स्थान भी मिला सम्मान भी मिले और जनवरी 2021 में मुझे (22) सम्मान भी मिले अब यदि जन्मदिन सालगिरह और शोक मनाता रहता तब क्या एक माह में (22) सम्मान क्या मुझे मिलते  समय निकल जाता जो दोबारा नहीं आता मेरी साहित्य सेवा भी प्रभावित होती ।
 कई मंच वालों को मिले सम्मान और प्रकाशित कविताएं मंचों में भेजने में आपत्ति होती यह तो साहित्य का ही अंग है साहित्य मंचों में नही भेजेंगे तो क्या बैंक में जमा करने को मिलते हैं कई मंचों ने इसी वजह से मुझे मंच से भी निकाल दिया मगर मैं अपने हिसाब से साहित्य सेवा करता हूं और करूंगा
 कई लोग बहाना करते हैं सम्मान  प्रकाशित कविताएं भेजने से मोबाइल बंद होता मगर उनका मोबाइल  जन्मदिन सालगिरह के चित्र भेजने से नही होता है इससे तो पूरे दिन मोबाइल भर जाता है जन्मदिन सालगिरह की बधाइयां मंचों में नही मनाना चाहिए जो हमदर्द है फोन से बधाई दो साहित्य मंचों को बाधित न करो।
 अब यदि मैं रहूं या न रहूं कोई मुझे कोई याद करें या न करें मेरी साहित्य सेवा और उससे मिली उपलब्धियां जरूर रहेगी ।
 किसी ने मुझे से प्रश्न किया 
प्रश्न.. केवल सम्मान, ना किसी के सुख ना किसी के दुख में भागीदार 
समय तो नहीं था मगर इसी बहाने यह लेख लिख गया
अब किसी को अच्छा लगे उसका भला हो जिसको बुरा लगे उसका भी भला हो ।
धन्यवाद
   अनन्तराम चौबे अनन्त
    जबलपुर म प्र 2778/
        4/2/2021

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