मंगलवार, 2 फ़रवरी 2021

शशिलता पाण्डेय जी द्वारा#नव वर्ष#

नया साल 2021
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सृष्टि का सृजन अनन्त है,
जहाँ आदि है वही अंत है।
पतझड़ के बाद बसंत है,
उदय जहाँ वहीँ अस्त है।
यहाँ नादानी मत कर प्राणी,
आदि-अंत का खेल जगत है।
2020 का उपक्रम करोना 
2020 का को ही अंत है।
जब होगा 2020  का अंत ,
बरसेंगी खुशियाँ अनन्त।
आगाज, नया अच्छा होगा,
सुन्दर होंगी फिर जग की रीत।
नये-नये सपनें अब, होंगे,
कोरोना काल भी जाएगा बीत।
सारी खुशियाँ अपनी होगी,
अपनी भी होगीं अब जीत ।
थोड़ा संयम रख ले प्राणी,
दुख-सुख दोंनों से कर प्रीत।
कल तो हमारा अपना होगा,
तू बन जा अभी अपनो के मीत।
2021 लेकर खुशियों के आएगा,
मिलेंगी कोई नूतन अनुपम सौगात।
सफलता की राह में बढेंगे कदम,
वैश्विक महामारी से मिलेगी निजात।
कोरोना की भी औषधि होगी ईजाद,
फिर होंगे अपने सपने पूरे, 
2021 की क्या बात!
 एक नया परिवेश मिलेगा,
 घूमने-फिरने को हर देश मिलेगा।
अपनों से मिलने का संदेश मिलेगा,
 अपनों को गले लगाने का आदेश मिलेगा।
 नए गीत गाएंगे करेगे ईश वंदन,
अपने सम्मानित जनो का करेंगे अभिनंदन।
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स्वरचित और मौलिक
सर्वाधिकार सुरक्षित 
कवयित्री:-शशिलता पाण्डेय
बलिया (उत्तर प्रदेश)

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