सोमवार, 1 फ़रवरी 2021

चंद्रप्रकाश गुप्त "चंद्र" जी द्वारा#नववर्ष#

शीर्षक -  नववर्ष 
यों ही नित नव वर्ष आये , प्रेम सुखद अनुराग छाये

यह घुटन घुटन सा वक्त जाये , हर पल नित नूतन हर्ष लाये

चुपके से मौसम विपदाओं का जाये , नव सृजन का श्रंगार लाये

मन हदय में बादल खुशियों के छाये ,जीवन कंटक से मुक्ति पाये

सूरज थोड़ी सी तपन लाये , कमल हृदय का खिलाये

नव चेतना नव जागरण लाये , उमंग की तरंग से मन विभोर हो जाये

स्वस्थ रहें सब व्याधियां जायें , विषाणु करोना जगत से जाये

प्रकृति सृष्टि सुधा रस वर्षाये , मानवता का संत्रास दूर हो जाये

नये वर्ष में नयी पहल कर , कठिन जिंदगी सरल बनायें

समय हमारे साथ चले , हम काल को अपना दास वनायें

हम कुछ ऐसा कर पायें , जीवन पल-पल सुखद वनायें

गीत गौरव वैभव के गायें , आत्मनिर्भर बनें स्वयं - और देश वनायें

यों ही नित नव वर्ष आये , प्रेम सुखद अनुराग छाये

यह घुटन घुटन सा वक्त जाये , हर पल नित नूतन वर्ष लाये

           चंद्रप्रकाश गुप्त "चंद्र"
           अहमदाबाद , गुजरात

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