सोमवार, 18 जनवरी 2021

अंतिम पत्र#प्रकाश कुमार मधुबनी'चंदन जी द्वारा खूबसूरत रचना#

*अंतिम पत्र 2020 के नाम*
प्रिय मित्र 
2020

आपका आना सौगात से कम नही रहा आपके आने के खुशी में हमने खूब पार्टी किया जश्न मनाया आज 
भी याद है जब शुरू के क्षण में कुछ 
लक्ष्य बनाया था कुछ अरमान सजा 
अपने आप से वादा लिया था जिसमें
बहुत सी बातें थी किन्तु आपने तो जैसे इसबार ठान ही लिया था की 
मुझे सीखा के रहोगे। सुरुआत में ही दिल्ली में का दंगा,फ़रवरी में शाहीन बाग फिर मार्च में तो कारावास ही करवा दिया बड़े मुश्किल में मैंने अपना एक कोचिंग सेंटर खोला था जिसे तुमने कोरौना नमन आतातायी भेजकर सत्यानाश कर दिया व जून आते आते बन्द करवा दिया कारावास की अवधि सितंबर तक बढ़ा दी। जाने कैसी सजा दी आपने।
खैर आपने ये कारावास के दौरान नई 
सोच नई राह नए पहचान भी दी। जिसमें साहित्यिक यात्रा में तेजी मुझे याद है जब जनवरी तक केवल 800 रचनाएँ ही लिख पाया था किंतु आज
2700 पार कर चुका हूँ। आपने इस वर्ष और भी अच्छे तौफे भी दिए गम के ऐवज में,वो है साहित्यिक गुरु व
 साहित्यिक मित्र जो आज जीवन के
अभिन्न अंग है जिसमें किसका नाम लू एक से बढ़कर एक मित्र मिले गुरु में तो आदरणीय श्री भास्कर सिंह माणिक कोच जी,आदरणीय चंद्र प्रकाश गुप्त जी श्री सुनील दत्त मिश्रा जी,आदरणीया श्रीमती गीता पाण्डेय व और भी गुरु मिला। मित्र में भी एक से श्री बढ़कर एक मित्र मिले श्री दीपक क्रांति जी,रूपा व्यास जी चेतन शर्मा,कवि कृष्णा सेंदल तेजस्वी प्रचण्ड जी,कवि श्रवण कुमार जी व अन्य और भी एक से बढ़कर एक मित्र दिया आपने।आपने और भी एक अजीज दोस्त दिया जिसका नाम पुष्पेंद्र सिंह है। तुमने आने पर मुझे
एक और चीज का अर्थ समझा दिया। जीवन में संघर्ष करना,व रोटी कपड़ा मकान की कीमत जीवन का उद्देश्य,अपना पराया व रिश्तों का महत्व इसलिये सभी गीले शिकायत के बावजूद भी तुम्हारा बहुत बहुत बहुत धन्यवाद। शुक्रिया मेरे जीवन 
में कठिन परीक्षा के लिए। बहुत बहुत धन्यवाद क्या करूँ कुछ गम कुछ खुशी लेकर चल पड़ा हूँ 2021 कि ओर तुम्हारे साथ बहुत से अपने मिले तो बहुत कुछ खोया भी कभी खिलखिलाया तो कभी खूब रोया भी। बहुत बहुत धन्यवाद ना अब तुम लौटेंगे ना मैं लौटूंगा तुम भी बित गए एक दिन मैं भी इतिहास बन जाउँगा।
धन्यवाद सहित तुम्हारा 
*प्रकाश कुमार मधुबनी"चंदन"*

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