शुक्रवार, 1 जनवरी 2021

कविता पंत जी द्वारा खूबसूरत रचना#

*नमन राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बदलाव मंच* 

*साप्ताहिक काव्य /काव्य गद्य प्रतियोगिता* 

*अवधि - 29 दिसंबर 2020 से 5 जनवरी तक* 

*दिनाँक - 31.12.2020*

*विषय - नया साल नए संकल्प 2021*
*विधा - *संस्मरण*-


आज तुम्हारा अंतिम दिन का  कार्यकाल है। कल तुम बीता हुआ साल हो जाओगे लेकिन यह मत समझ लेना कि तुम याद नहीं आओगें।

 मेरा वादा है तुमसे मैं तुम्हें अच्छी सोच अच्छी याद के साथ संजो कर रखूँगी।  अच्छे विचार क्यो..?....यही प्रश्न है न तुम्हारा....सही बात है पर शायद मेरे पास सटीक उत्तर है।मेरी बात सब माने यह आवश्यक नहीं परन्तु कोई भी न सहमत हो ऐसा भी नहीं..... मैं तुमको अपना मित्र घोषित करती हूँ। सदा हँस कर याद करूंगी 2020 को ... क्योंकि तुम (2020)मुझे बहुत कुछ सिखा गए सबसे बड़ी बात तो यह है कि लेखन व लेखनी का महत्व भी समझा गए हो। बहुत बड़ा *बदलाव*-आया मेरे जीवन में।इस *बदलाव-*- ने मुझे साहित्य की कई विधाओं से परिचित कराया सारथी के जैसे सही दिशा दिखाता गया।
       अभी तुम रात 12 बजे तक तो साथ हो न ....अच्छे से विदा करूँगी तुम्हें। एक सच्चे मार्गदर्शक की भांति तुमने अपनो का महत्त्व, घर का औचित्य, जीवन का मोल बताया ।
       
   मेरे लिए तुम खास रहे मेरे मित्र क्योंकि तुमने सच्चे सखा के सभी धर्म तुमने निभाए इसलिए तो  मुझे अपनों का, परायो का परिचय हों गया। आर्थिक ,राजनीतिक सामाजिक सभी दृष्टिकोण से अवगत कराते रहे तुम ।मुझे आता है याद बार-बार संबंधों की महत्ता समझी मैंने शायद इसी बार ...माँ दिन भर काम करती है मशीन के जैसे चलती रहती है.. वह 2020 में भी नहीं थकी ।  मेरे दोस्त तुम  तो भाई यादगार बन कर जा रहे हो  कई परेशानियों को झेल कर भी कार्यकाल पूरा करके ही जा रहे हो तुमने शायद ठान लिया था कि मेरी मुझसे पहचान करा कर जाओगे। मैं भी थोड़ा लिख सकती हूं यह बता कर तुम जा रहे हो ।तुम तो *-दीपक*-के सम हो जो सबको रोशनी देता रहा जल जल कर... मैं कभी नहीं कहूंगी कि तू जल्दी से जा, तू शुभ नहीं है ,...बल्कि क्षमाप्रार्थी हूँ हम इंसान तुझे कुछ ना दे सके।यादें बनकर हमेशा साथ रहोगे तुम 2020 तूने तकनीक में हम लोगों को उन्नत बनाया रसोई घर में पुरुषों से भी काम कराया घर का मूल्य तूने ही  बताया । अनमोल शब्द का अर्थ अब समझ आया । जीवन की आधारभूत आवश्यकता रोटी ,कपड़ा ,मकान का अर्थ समझा गया । सुन  मेरे सखा तू 2021 में भी मित्र रहेगा।मेरी यादों में तू सदा जिएगा।अलविदा मेरे दोस्त मेरे अपने 2020 .

कविता पंत
स्वरचित संस्मरण
अहमदाबाद, गुजरात

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