मंगलवार, 26 जनवरी 2021

स्वप्निल जैन(छिन्दवाड़ा)जी द्वारा अद्वितीय रचना#नया साल नए संकल्प#

बदलाव मंच अन्तराष्ट्रीय/राष्ट्रीय को नमन।
साप्ताहिक प्रतियोगिता 29/12/20 से 05/01/21 हेतु
विषय: नया साल, नये संकल्प,2021
विधा: काव्य।
दिनांक: 05 जनवरी 2021
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नववर्ष के नवप्रभात में सब मंगल गायेंगे।
नववर्ष में झूमेंगे सब नव उत्कर्ष मनायेंगे।

बीते वर्ष की बीती यादें, याद सभी को आयेंगी।
कोरोना की हलचल दुनिया में, याद बहुत दिलायेंगी।

कुछ साथी बिछड़े, कुछ अपने साथी छूट गये।
बीस बीस(2020) के बीते वर्ष में अपनों को ये लूट गये।

दिल जिनसे मिलता था वो साथी संग ना होंगे अब।
पर यादों में उनकी बीस इक्कीस (2021) को जी लेंगे हम।

खुशियों की बौछारें आयीं, चेहरे पर लालीमा छायी।
कोरोना में जब-जब हमने अपनों के संग बीती याद दोहरायी।

कुछ को खट्टी, कुछ को मीठी यादें भी मिली मगर।
कोरोना में एकल से संयुक्त परिवार का फिरसे हो गया घर।

कुछ घर में दादी-दादा संग साथ ना रहते थे।
चाची-चाचा दूर हुये थे, बहन-भाई ना मिलते थे।

कोरोना में सब घर में थे, काम सभी का बंद हुआ।
जो कहते थे समय नही है, अब दिन भर का आराम हुआ।

खाट अकेले लेटे रहते, दिन बचपन के याद आ जाते थे।
तभी सभी को चाचा चाची के बच्चे याद आ जाते थे।

उठा फोन ना रहा गया, सबको कॉल लगाते थे।
भूल पुराने शिकवों को, तब सबको घर वो बुलाते थे।

कहीं खुशी तो कहीं गमों की याद ये साल दे जाता हैं
पर बीस बीस में संस्कारों का बीजारोपण होता नजर आ जाता है।

घर-घर रामायण का पाठ हुआ ,महाभारत अध्याय खुला।
राम-सीता का चरित्र दिखा और मन में सबके संस्कार घुला।

इन संस्कारों के बीजों को वृक्ष बनाएंगे, नये संकल्प संग।
बीस इक्कीस(2021) के नये साल को खुशियों से महकायेंगे।
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स्वरचित व मौलिक रचना:
स्वप्निल जैन(छिन्दवाड़ा)
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