शनिवार, 23 जनवरी 2021

डॉ ममता श्रीवास्तवा,जी द्वारा अद्वितीय रचना#

राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बदलाव मंच 
साप्ताहिक काव्य प्रतियोगिता 

दिनांक :- 29 दिसंबर, 2020 से 5 जनवरी, 2021
विषय :- नया साल, नए संकल्प, 2021

शीर्षक-नववर्ष का संकल्प 
वरिष्ठ या बुजुर्ग शब्द का प्रयोग करते ही हमारी आंखों के सामने एक बड़ा सा व्यक्ति नजर आता है अमूमन लोग यही समझते हैं इस शब्द का मतलब है एक रिटायर्ड पर्सन जिसकी जिम्मेदारियां हमें संभालने होंगी। आज की युवा पीढ़ी शायद यही समझ कर इस जिम्मेदारी को बोझ समझने लगी है और अपनी जिम्मेदारी से कतराते हुए अपने घर के बुजुर्गों को वृद्धाश्रम का रास्ता दिखाने लगी है, जबकि मेरी नजर में वृद्ध वरिष्ठ या बुजुर्ग व्यक्ति का अर्थ है एक अनुभवी समझदार शांत और सूझबूझ वाला व्यक्ति अब बताइए ऐसे लोगों को देखने का दृष्टिकोण बदल गया ना, यकीन मानिए घर की शान होते हैं ये। जिस प्रकार घर के मुख्य द्वार पर नीम और पीपल के पेड़ अपनी छाया और शीतलता से पूरे गांव की, पूरे घर की शोभा बढ़ाते हैं। प्रकृति के हर बदलते मौसम से उसकी सुरक्षा करते हैं, ठीक उसी प्रकार हमारे बुजुर्ग हमारे हर विषम परिस्थितियों में हमारा मार्गदर्शन करते हैं, हौसला बढ़ाते हैं और हमें जीने का एक नया रास्ता दिखाते हैं। मुझे आज भी याद है मेरे नाना जी, हम बच्चे गर्मी की छुट्टियों में जब नानी के गांव जाया करते थे तो छुट्टियों के बाद लौटने में अपने नाना जी के द्वारा सिखाए गए तमाम मंत्रोच्चारण- गायत्री, महामृत्युंजय,शांति मंत्र इत्यादि सीखकर और हमारे क्रांतिकारियों के कारनामे, पुराने महान योद्धाओं की कहानियां, इतनी सारी जानकारियां इकट्ठा करके स्कूल में अपने दोस्तों को बता कर किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर कहानियों को सुनाकर कितनी शाबाशियां लूटा करते थे। हमारे बुजुर्ग हमें हंसते खेलते हमारी संस्कृति से जोड़ते हैं। नानी और दादी की कहानियां हमें हमारे इतिहास सिखाती है। हमारे बुजुर्ग हमारे आसपास आत्मविश्वास का वह गहरा घेरा बनाते हैं जिनको तोड़ कर विषम परिस्थितियों को हम तक पहुंचने से पहले 10 बार सोचना पड़ता है, क्योंकि हर ऐसी परिस्थिति से जूझने का एक नया रास्ता एक नया अनूठा तरीका होता है हमारे बड़ों के पास।
हमारे बुजुर्ग फल से लदे हुए उस वृक्ष के समान हैं जिसके नीचे तनिक देर ठहरने से पथिक को शीतल छाया, विश्राम के साथ-साथ मीठे फल भी खाने को मिलता है ठीक इसी प्रकार अपने बुजुर्गों के सानिध्य में बैठने से उनके अनमोल वचन अनुभव विचार हमें भविष्य में आगे बढ़ने की सूझबूझ की एक अलग तरह की जानकारी देते हैं।
तो आइए नववर्ष पर संकल्प लें कि अपने बडों का आदर करेंगे। 
डॉ ममता श्रीवास्तवा,सरूनाथ।

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