रविवार, 17 जनवरी 2021

चंचल हरेंद्र वशिष्ट, जी द्वारा अद्वितीय रचना#2020 से 2021 में#

2020  ''कुछ नया हो अगर" 2021
      
सिर्फ एक तारीख बदलेगी,कहने को साल नया है
वही दिवस है वही रात  है, फिर जाने क्या नया है!

वही रोज़ का खाना,नहाना, वही रोज़ के काम
वही रोज़ के लेने देने, वही सुबह, वही शाम
किए हों कुछ काम नए तो, समझो तुम साल नया है
वही दिवस................क्या नया है!

हम भी वही हैं, तुम भी वही हो, वही है घर परिवार
वही है सब रिश्ते-नाते, वही पड़ोसी,रिश्तेदार
बदली हो गर सोच नयी तो,समझो तुम साल नया है
वही दिवस.........……....क्या नया है!

वही रोज़ के धरने प्रदर्शन,वही जी का जंजाल
वही रोज़ के आंदोलन,नारे, वही दंगे हड़ताल
देशहित में कुछ नया हुआ हो तो, समझो साल नया है
वही दिवस.................क्या नया है!

गर नफ़रत ईर्ष्या,द्वेष,पाप और आतंक घटा हो
माँ बहन बेटियों के मन से भय और खौफ मिटा हो
बदले हों हालात समाज के,तो समझो साल नया है
वही दिवस .......…......क्या नया है!

यदि वृद्धाश्रम में वृद्धों की संख्या बढ़ी न हो
चाहे समस्या कोई हो,हौसलों से बड़ी न हो
सफलता की नई इबारत देश ने,लिखी हो तो साल नया है
वही दिवस................क्या नया है!

पूरे वर्ष छाई रही कोरोना व्याधि इस बार
अभी तक मचा हुआ है विश्व में हाहाकार
मिट जाए महामारी और दहशत तो समझो साल नया है
वही दिवस................क्या नया है!

नई उमंग हो नई आस हो और सबसे हो प्यार
जीवन में छा जाए नव खुशियों की नई बहार मिटे सबके दिलों से अहंकार, तो समझो साल नया है
वही दिवस..............क्या नया है!

सिर्फ एक तारीख बदलेगी, कहने को साल नया है
वही दिसंबर वही जनवरी, फिर जाने क्या नया है!

स्वरचित रचना:
-चंचल हरेंद्र वशिष्ट, 
 हिन्दी प्राध्यापिका,थियेटर प्रशिक्षक एवं कवयित्री,आर. के. पुरम,नई दिल्ली

नववर्ष की मंगलकामनाओं के साथ बदलाव मंच पर सभी रचनाकार साथियों को समर्पित🙏🎉🎉🎉🎉🎉🎉🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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