बुधवार, 23 दिसंबर 2020

विष्णु चारग अलीगढ़ जी द्वारा अद्वितीय रचना#

*सर्वप्रथम मंच को नमन*
*एक दिवसीय प्रतियोगिता हेतु*
*शीर्षक    :-    आत्मनिर्भर भारत मे उड़ान विज्ञान तकनीकी का योगदान*
*आत्मनिर्भर* होने का अर्थ है स्वयं पर निर्भर रहना, अर्थात दैनिक जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं व उच्चतर सुविधाओं एवं राष्ट्र सुरक्षा के लिए किसी अन्य बाहरी शक्ति पर आश्रित न रहना।
*धरती ये फिर से उगलेगी सोना*
      *खेतों को उर्वर होना है*
*ए भारत तुझे फिर से आत्मनिर्भर होना है।*
भारत प्राचीन समय से ही आत्मनिर्भर रहा है। भारत की रीढ़ की हड्डी समझी जाने वाली कृषि व ग्रमीण अर्थव्यवस्था ने सदैव ही आर्थिक मंदी के समय आगे आकर देश को संभाला है किंतु आज के इस बदलते परिदृश्य में वैश्विक होती अर्थव्यवस्था ने विश्व के सभी राष्ट्रों को आपस में इतने नजदीक ला दिया है कि वे न चाहते हुए भी किसी न किसी क्षेत्र में एक दूसरे पर अन्योन्याश्रित हो गए हैं। 
ऐसे समय में जबकि covod 19 महामारी के कारण सभी देश अपनी नीचे की ओर जाती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए जूझ रहे हैं तब भारतीय प्रधनमंत्री ने *13 मई 2020* को आत्मनिर्भर भारत का विकल्प सुझाया जो कि आधुनिक परिस्थितियों में पूर्णतः प्रासंगिक नज़र आता है। 
भारत को अपनी अधिकांश संचित धनराशि अन्य राष्ट्रों से अपनी विशाल कार्यशील एवं निर्भर जनसंख्या के पोषण एवं उच्चतर आवश्यकताओं के लिए खर्च करनी पड़ती है, जिससे राष्ट्र के विकास कार्यो के लिए पर्याप्त राशि न मिल पाने के कारण वे बाधित होते हैं। 
आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत विज्ञान और तकनीकी का प्रयोग कर फसलों की अच्छी उपज की किस्में तैयार की गई हैं और अधिक अन्न उत्पन्न करने में सफलता हासिंल हुई है।कुटीर एवं लघु उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उच्चतम तकनीकी का प्रयोग करके पशुओं की उत्तम नश्ले तैयार की हैं एवं कृत्रिम गर्भाधान से अनुपयोगी पशुओं को उपयोगी बना न केवल हम दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बने हैं बल्कि दूध के उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर निरन्तर बने हुए हैं। इसी तकनीकी के प्रयोग से ही हम *-* लौह अयस्क, कच्चे हीरे, कपास, ग्रेनाइट, कार्बनिक रसायन, मछली, खाद्य पदार्थ एवं स्वास्थ्य सेवाएं *-* आदि क्षेत्रों में न केवल आत्मनिर्भर हुए हैं बल्कि विश्व के अनेक प्रमुख देशों को इसका निर्यात भी करते हैं जोकि आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत हमें तकनीकी की सहायता से मिली सफलताओं के ही परिणाम हैं।
आत्मनिर्भर अभियान के अंतर्गत 
जहाँ पहले हम अधिकांश देशों से होने वाले आयात पर ही निर्भर रहते थे वहीं अब उन्हीं देशों को अधिकाधिक सामान निर्यात भी करते हैं जिसके फलस्वरूप हमें अपना *व्यापार घाटा* कम करने में अभूतपूर्व सफलता हांसिल हुई है।

भारतीय दूतावास द्वारा संग्रहित आंकड़ो के अनुसार भारत चीन के सामान *(* मुख्यतः कार्बनिक रसायन,उर्वरक, एंटीबायोटिक्स, एल्युमिनियम फवायल *)* के लिए सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य था, जबकि उसका भारत से आयात निर्यात के अनुपात में कम था जिससे भारत का व्यापार घाटा 2017-18 में लगभग 63 अरब डॉलर तथा12018-19 में लगभग 53 अरब डॉलर था किंतु इस वर्ष चीन के सीमा शुल्क विभाग की ओर से जारी आंकड़ो के अनुसार भारत की चीन से आयात में 13% फीसदी की गिरावट आई है, जबकि निर्यात में 16% फीसदी की तेजी दर्ज की गई है। जिससे भारत का चीन से  व्यापार घाटा लगभग 48 अरब डॉलर पर आ गया। सयुंक्त राज्य अमेरिका से भी अत्यधिक आयात की अपेक्षा निर्यात पर बल देकर व्यापार घाटे में निरंतर कमी दर्ज की गई है एवं अन्य यूरोपीय देशों के साथ में व्यापारिक संबंध अपने उच्चतर स्तर की ओर अग्रसर हैं जिसे आत्मनिर्भर भारत की ही एक कड़ी माना जाना चाहिए। जो कि उच्च वैज्ञानिक तकनीकों से ही संभव हुआ है।
भारत की ISRO, DRDO एवं अन्य प्रमुख रक्षा एजेंसियों ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत ही भारतीय सेना की जरूरत के अनुसार रक्षा सामग्री को डिजाइन करके बनाना शुरू कर दिया है जिससे प्रथम, भारतीय सेना की विदेशी कम्पनियों पर अपनी जरूरतों के लिए निर्भरता खत्म हो जाएगी एवं द्वितीय, इससे समय एवं पैसे की जो बचत होगी उसे विकास कार्यों पर लगाया जा सकेगा।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना *आत्मनिर्भर भारत अभियान* सिर्फ खाद्य सामग्री या आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था में आत्मनिर्भर होने से नहीं बल्कि *भविष्य के भारत का पुननिर्माण* करना है जो कि जो कि तकनीकी एवं विज्ञान के समन्वित व संतुलित विकास से ही संभव है।

*विष्णु चारग  अलीगढ़ , उत्तर प्रदेश*

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