शुक्रवार, 11 दिसंबर 2020

कवि सतीश लाखोटिया द्वारा 'अन्नदाता की व्यथा' विषय पर रचना

*अन्नदाता की व्यथा*

किसानों की व्यथा
कोई न जाने
राजनीति के चक्रव्यूह को
कोई न पहचाने

सत्ताधीशो के
नाक में आ गया दम
संकट आया उन पर घोर
 बात बिगडते देख
मचाया उन्होंने
अफवाहों का शोर

किसान ने छोड़ दिया
अपने तीर से कमान
बचाने लगे स्वयं को
धरा के स्वयंघोषित भगवान

आर पार की लड़ाई करेंगी 
 सही या गलत का आकलन
किसानों के इस आंदोलन से
विचलित हो गया सिंहासन

 सोशल मीडिया के जरिये
 स्वयं के ही यूनिवर्सिटी से
 बनाये गए संदेशों से नेतागण 
बता रहे स्वयं को बेकसूर
पढ़कर, सुनकर
जनता जनार्दन
हो रही भ्रमीत
हकीकत से आम जनता कोसो दूर

सत्तापक्ष एंव आंदोलनकारी 
दे रहे अपने तर्क वितर्क
वक्त ही बतायेंगा 
 क्या है
परदे के पिछे का सच अब

सतीश लाखोटिया 
नागपुर महाराष्ट्र

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें