शुक्रवार, 11 दिसंबर 2020

कवयित्री डॉ. अनिता पाण्डेय द्वारा 'लोकतंत्र' विषय पर रचना

बदलाव मंच के पटल पर आयोजित विडियो काव्य प्रतियोगिता हेतु स्वरचित एवं मौलिक काव्य रचना

शीर्षक : लोकतंत्र
दिनांक : ०७/१२/२०२०
कहने को तो लोकतंत्र है भारत का शासन,
और कहलाता भी है यह जनता का शासन
लोकतंत्र करता समूहो का संगठन या संगत,

जनता करती चुनाव अपने प्रतिनिधि का
चाहती अच्छी सुव्यवस्था शासन का
लेकिन चुनाव के बाद शासन है किसका?

लोकतंत्र का अर्थ गया है बदल
अपनी ढपली अपना-अपना राग,
जिसकी लाठी उसकी भैस है आजकल।

ऎसे में कैसे होगा भारत का विकास?
नेता करने लगे है खुद का विकास 
सोचो क्या सच में है लोकतंत्र? 

पैसे के बल पर प्रतिनिधि है बनता  
अनपढ़ लोग बनाते शासक आज का
चुनाव करते हमारे देश के प्रतिनिधि का

प्राचीन काल में थी लोकतंत्र की,
सुदृढ़ व्यवस्था शासक व शासन की,
योग्यता थी आधार  चुने जाने की।

ऋगवेद व कौटिल्य ने लोकतंत्र का असली
मायने बताया और स्वतंत्र मार्ग है दिखाया 
योगयता व कर्मठता ही आधार था नेता का।

तभी अखंड भारत का सार्थक हुआ सपना
योग्य शासक ही विकास है कर सकता 
दूर दृष्टि और विकास ही हो एक सपना 
मेरे विचार से सही अर्थ है लोकतंत्र का॥ 
 -- डॉ. अनिता पाण्डेय

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