शुक्रवार, 11 दिसंबर 2020

कवि श्याम कुँवर भारती द्वारा रचित गीत

भोजपूरी देवी गीत (आल्हा धुन) – मइया न देर लगाय |
मुंह से महिमा केतना सुनाये,कालिका बरनी ना जाय | 
जेतना गाई ओतना पाई ,गावत गावत पार ना पाय |
जय जय हे काली भवानी ,किरपा तोहरो गवलो ना जाय | 
हाथ जोड़ी के जे भी पुकारे ,देवी उनपर खुश होई जाय |
नारियल सुपारी फूल चढ़ावे ,माई मगन तब होई जाय |
बड़ी दयालु मोरी काली माई ,आवत कबों ना देर लगाय |
लाल चुनरिया चम चम चमके , रूपवा माई निरख ना पाय |
जे भी पूजे उ फल पावे ,भगतन झोली खाली ना जाय |
ढ़ोल नगाड़ा घंटा बाजे , बजे शंख रहे गगन घहराय |
जगमग जगमग ज्योति जरावे ,धूप कपूर रहे सब महकाय |
काली माई मूहवा उजारा ,जीभवा लप लप लाल लपकाय |
माई चरण सब शीश झुकावे ,वर देवे माई हाथ उठाय |
जादू टोना भूत परावे ,जब जब नाम काली गोहराय |
छप छप कांटे दुखवा हरावे ,थर थर बैरी भाग पराय |
माई के आरती भारती गावे ,जागा मईया ना देर लगाय | 

श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी 
बोकारो झारखंड

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