बुधवार, 2 दिसंबर 2020

सतीश लाखोटिया जी द्वारा बेहतरीन रचना#

कुछ सवाल है मेरे
 कु - कुशाग्र बुद्धि मेरी
         कर रही  मुझसे
स्वयं ही बात
      क्या तुम्हें मिल गए
      तुम्हारे मन के 
सारे सवालों का जवाब

छ  - छत दिल की उखड गई 
   प्लास्टर कैसे करु इसका
इसका नहीं मिल रहा कोई जवाब

स - संकलन कर रहा 
       मैं प्रश्नों का
      दिल ही दिल में
     प्रश्नों का लग गया अंबार
  आ गया मैं मुश्किल में

वा - वादे किए थे
       स्वयं से ही अगिनीत
       कैसे बताऊं दुनिया को
       मेहनत करने के बाद भी
     खुली नहीं मेरी किस्मत

ल - लक्ष्य निर्धारित
       करके चला में
       जीवन के कर्म पथ पर
       मन में उठता एक ही सवाल
     मानो या ना मानो
      यह तो है भाग्य का असर

 है - हैरत में नही मैं
       समझ गया मैं
        यह समय की चाल
         कोई नहीं धरा पर ऐसा
        जिसे मिल गया हो
        सारे मन के सवालों का जवाब

मे - मेहनतकश इंसान
      चाहे कितने भी 
     कर ले तर्क वितर्क
      कई सवालों के साथ
       जीता वह जीवन भर

रे   -  रेत जब भी लेते
        हम मुठ्ठी में
        थोड़ी बहुत गिरती 
      हमारे  हाथों से
    उसी तरह  जिंदगी के
  कुछ सवाल 
  फिसलते ही रहते 
 इस संघर्षमय  जीवन  में

सतीश लाखोटिया
नागपुर, महाराष्ट्र

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