बुधवार, 2 दिसंबर 2020

निर्मल जैन 'नीर' द्वारा बेहतरीन रचना

प्रतीक्षा का पहाड़...
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कैसा दस्तूर~
पास रहकर भी
कोसो है दूर
दिल में प्यार~
प्रतीक्षा का पहाड़
मानी न हार
मजबूरियाँ~
ज़ालिम है ज़माना 
रखो दूरियाँ
दुर्गम पथ~
हमारा ये जीवन 
है अग्निपथ
जग है रूठा~
इंतजार का फल
सदा ही मीठा
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निर्मल जैन 'नीर'
ऋषभदेव/उदयपुर
राजस्थान

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