गुरुवार, 3 दिसंबर 2020

राजेश तिवारी "मक्खन जी द्वारा खूबसूरत रचना#

नमन मंच
बदलाव मंच /राष्ट्रीय, अन्तरराष्ट्रीय/
साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु रचना
विषय: किसान
विधा : कविता
1/12/2020
मंगलवार
( किसान की व्यथा कथा )


आसमान से ओले आते देख आख भर आयी ।
बने विधाता बाम कृषक  ने कैसी किस्मत पायी ।।

कर परिश्रम्य असीम खेत में बीज कृषक ने बोया ।
चाय हो गया श्याम घाम से रात नींद अति सोया ।।
जमा बीज जब देख रेख हुआ हृदय हरषायी  ।।-.--.--.--.--.--.-१

नींद गुडाई करी कुटुम्ब संग ,सीच सीच  श्रम भारी ।
किया कलेऊ बैठ कदम्ब तर ,जल  भर लायी नारी।।
किया हास परिहास विगत श्रम , हाथ कुदाल उठायी ।।-.--.--.--.--.--.-२

लगा के बारी कर रखवारी बीत विभावरी जाती   ।
रोज रोज और नील गाय के कारन नीद न आती   ।।
मेङन मेङन करत रतजगा , गावत फाग दिवायी ।।-.--.--.--.--.--.--.-३

खेत लहलहा देख कृषक तब मन में है हरषाता  ।
बरष जाहि में ब्याह बिटू को लगता करत विधाता ।।
कंगन कर्ज में रखे कबैके , अबके लेहु उठायी   ।।-.--.--.--.--.--.--.--.--.-४

घटा घिरी घनघोर  चहु दिश गया हृदय घबरायी ।
सोचा क्या क्या आज परभू जी  कैसी विपदा आयी ।।
 दौङा दौङा गया खेत पर गिरा भूमि  भररायी ।।-.--.--.--.--.--.--५

आसमान से ओले आते देख आख भर आयी ।ओ
फसल नष्ट सी देख दुर्दशा  हारा हिम्मत भायी ।।
चढ बबूल पर वाही दिन को फासी गले लगायी ।।-.--.--.६

प्यारे ऐसा न करते तुम , मेहनत मजदूरी करते ।
पीले हाथ अपनी बिटिया के, सम्मेलन में करते ।।
सोची समझी नहीं सजन ने , आफद द ई बङायी ।।
बने विधाता बाम कृषक ने,कैसी किस्मत पायी ।।.......॥॥.७

राजेश तिवारी "मक्खन" 
झांसी उ.प्र.

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें