शुक्रवार, 11 दिसंबर 2020

कवि अनिल मोदी द्वारा 'अहंकार को दे तिलांजलि' विषय पर रचना

विषय :- अहंकार को दे तिलांजलि
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अहंकार है मानवीय स्वभाव
नहीं करता कोई इसका त्याग
छोटा बडा हो या अमीर गरीब
अहंकार हर चेतन हर जीव
अहंकार का बसेरा सिर्फ मानव में
अन्य किसी भी वन्य प्राणी में नहीं
अहंकार खा जाता है बुद्धि बल को
अहंकारी को आभास होता है , मैं
मैं ! यानी सर्व शक्तिमान ।
अहंकार बडे से बडे सुरमाओं का खाक हो गया,
 हम कहां, आकलन करे।
अहंकार से क्या मिलता
नफरत,ईर्ष्या द्वेष दुश्मनी।
जहां अहंकार है वहां प्यार नहीं
स़मता, सक्षमता सद् भाव नहीं।
अहंकारी को अंतर से कहीं सम्मान नहीं।
सुख में चापलूसी दुःख में कोई नहीं।
अहंकार किया रावण ने
श्री राम ने मारा।
दुर्योधन गर्वित हो सब कुछ हारा
ना करो अहंकार, हिय बसे सदा प्यार।
अनिल मोदी, चेन्नई

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