रविवार, 13 दिसंबर 2020

कवि स्वप्निल जैन द्वारा 'किसान' विषय पर रचना

बदलाव मंच अंतराष्ट्रीय और राष्ट्रीय को नमन
साप्ताहिक वीडियो काव्य प्रतियोगिता हेतु।
विषय/ शीर्षक:- किसान।
दिनांक:- 01 से 08 दिसंबर 2020 
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जो आन है, सम्मान है, भारत देश की जिससे पहचान है।
धोती कुर्ता, सर में पगड़ी जिसकी वेशभूषा की पहचान है।

हाथों में हल और बैलगाड़ी की कमान है
जो देश का आधार है, जिसका जीवन सारा उधार है।

जिसके कारण देश खाता है, पिज्जा बर्गर और चाट कटौरी,
उसके घर में दो वक्त की भी नही मिल पाती "सब्जी और रोटी"

वो मेहनतकश, वो अभिमानी, वो स्वाभिमानी कहलाता है
वो अक्सर खेतों-खलियानों में, गाँवों में नजर आ जाता है।


भरी ठंड में सुबह-सुबह वो पानी बगाने जाता है
चाहे पड़ जाये भीषण गर्मी, भरी दुपहरी में हल चलाते जाता है

देश के कुर्सीधारियों के द्वारा, 
वो देश का अन्नदाता और गौरव बताया जाता है
बस कहा जाता है, ध्यान नही दिया जाता,
तभी तो वह अन्नदाता, आत्महत्या कर जाता है।

सूखी-सुर्ख माटी को लहलहाती फसल बनाता है
घर-घर में अनाज का दाना पहुँचाता है।
तभी तो वो देश का अन्नदाता कहलाता है।

न सिर्फ अनाज वो फल, सब्जी, फूल, कपास, औषधि 
और कई अनेक फसलों को उगाता है।
तभी तो वो देश का आधार बन पाता है।

वो मेहनत करता है पसीना बहाता है
तब जाकर फसल उगाता है
उसमें भी कभी बाढ़ तो कभी आपदा
तो कभी कर्ज सताता है।

वो बार बार गिरता है, उठता है
फिर गिर जाता है
वो बहुत हिम्मत वाला है
वो किसान कहलाता है।
वो किसान कहलाता है।

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मेरी स्वरचित / मौलिक रचना।
रचनाकार:- स्वप्निल जैन(छिन्दवाड़ा,मप्र)
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