बुधवार, 2 दिसंबर 2020

शशिलता पाण्डेय जी द्वारा अद्वितीय रचना#

आँसू
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अधर मौन आँखों से बहकर,
दिल का हाल बताते आँसू।
जब अन्तर्मन में हो कोई पीड़ा
किसी अपनो ने दिल को  तोड़ा,
मन की पीर नैनो से नीर।
हो मुखर भाव जताते आँसू,
हृदय की हलचल की भाषा,
पत्थर दिल पिघलाते ये आँसू।
मन के भाव की हर परिभाषा,
आँखों से झरकर समझाते आँसू।
विरहणी हो विरह-वेदना से पीड़ित
बहकर दिल को बहलाते आँसू।
अन्तर्मन की खुशियों का संगीत,
आँखों से खुशियाँ दर्शाते आँसू।
निःशब्द अधर हो भावविह्वल चित,
होते आँखों से मुखर ये आँसू ।
प्रीत की एक रीत आँखों से बहकर,
हाले दिल बयां कर जाते आँसू।
अन्तर्मन की हर व्यथा को नैनो,
से गिर कर निर्मल कर जाते आँसू।
नारी की शक्ति का एक आधार,
भावनाओं का व्यवहार ये आँसू।
 दिल की पीड़ा प्रदर्शित करने का,
हर नारी का हथियार ये आँसू।
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स्वरचित और मौलिक
सर्वधिकार सुरक्षित
कवयित्री-शशिलता पाण्डेय
बलिया(उत्तर प्रदेश)

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