बुधवार, 2 दिसंबर 2020

कवि भास्कर सिंह माणिक कोंच द्वारा 'रामसेतु' विषय पर रचना

मंच को नमन
     शीर्षक-
         रामसेतु
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सम्मान बलिदान का 
प्रतीक है रामसेतु।
धर्मनिरपेक्षता का 
प्रतीक है रामसेतु ।
रामसेतु सूचक है 
मित्रता और प्रेम का।
मानवतावाद का 
प्रतीक है रामसेतु।

अनाचार दुराचार 
घमंड के विरोध का।
ज्ञान और विज्ञान के
अद्वितीय शोध का।
समाज उत्थान का 
प्रतीक है रामसेतु।
शौर्य धैर्य श्रम का 
प्रतीक है रामसेतु।

ऊंच-नीच की रुढ़ि
भेदभाव मेंटने का।
धनवान और गरीब 
की खाई पाटने का।
एक सूत्र बांधने का
प्रतीक है रामसेतु।
सत अहिंसा धर्म का
प्रतीक है रामसेतु।

शुभारंभ श्रद्धा भक्ति के 
महान यज्ञ का ।
मर्यादा पालन 
कर्तव्य के मर्मज्ञ का।
भारतीय संस्कृति का 
प्रतीक है रामसेतु।
आज्ञा के पालन का
प्रतीक है रामसेतु।

मित्र के मान अधिकार
वचन के निर्वाह का।
व्यर्थ के विवाद
धूर्त भाव के दाह का।
प्रेम सम व्यवहार का 
प्रतीक है रामसेतु।
आन बान शान का 
प्रतीक है रामसेतु।

मातृभूमि की रक्षा
स्वाभिमान विवेक का।
राष्ट्रभक्ति त्याग 
संवेदना सौहार्द का।
माणिक नव शोध का
प्रतीक है रामसेतु।
न्याय की स्थापना का
प्रतीक है रामसेतु।
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   मैं घोषणा करता हूं कि यह रचना मौलिक स्वरचित है।
             भास्कर सिंह माणिक, कोंच

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