बुधवार, 4 नवंबर 2020

डॉ.अलका पाण्डेय#दोहे#

संस्कार पर दोहे - समीक्षार्थ 


एक सा ही पालन किया , बच्चो को माँ बाप ।
एक संस्कारी है बना  ,एक करता है पाप ।।

एक जा रहा मंदिर है । एक  पड़ा मदिरालय । 
कारण समझे न इसका , जाये न शिवालय ।।

बात करे संस्कार की , दिल पर करते चोट ।
कहते रहते है सत्य , मन में रखते खोट ।।
बिगड़ गये संस्कार है , भोग रहा परिवार । 
सफल जनम करो अपना , अपना लो संस्कार ।।

तुम को होगा बदलना , अपना ही स्वभाव । 
करते  सब तिरस्कार है , दिल पर देते घाव ।।

फूलो की तरह महको , सबका करो सत्कार । 
मिले तुम्हें अपार खुशी , सब माने उपकार ।।

धारे मन संस्कार जो , मिले बैकुंठ धाम । 
जग में मिलती है कीर्ति,चले चार जो  धाम । 

डॉ.अलका पाण्डेय

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