भास्कर सिंह माणिक,कोंच जी द्वारा# मर्यादा#

मंच को नमन

               मर्यादा
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माता- पिता
होते हैं
ईश्वर के समान
करते हैं
लालन पालन
बनाते हैं संस्कारवान
सिखाते हैं मर्यादा

माता-पिता 
समझाते हैं
गिरकर ,उठना
हर हाल में मुस्कुराना
देते हैं
संसार का ज्ञान
सिखाते हैं मर्यादा

माता- पिता
समझाते हैं
मानवता का अर्थ
होता है 
उनका एक-एक शव्द सार्थक
नहीं गंवाना समय व्यर्थ
बताते हैं जीवन का मूल्य
सिखाते हैं मर्यादा

माता- पिता
करते हैं प्यार
नींव के
होते हैं आधार
कभी नहीं होते नाराज
करते हैं सब हित के काज
रहते हैं मर्यादा में
सिखाते हैं मर्यादा

अनुशासन का पाठ पढ़ाता
यश सम्मान दिलाता
बैर भाव मिटाता
तम में दीप जलाता
धर्म -संस्कार
बनना है महान
तो
ईश्वर
माता- पिता
संसार
मानवता
धर्म -संस्कार
का करना पालन
यही बताते हैं हमारे पूर्वज
सिखाते हैं मर्यादा
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मैं घोषणा करता हूंँ कि यह रचना मौलिक स्वरचित है।
        भास्कर सिंह माणिक,कोंच
भास्कर सिंह माणिक,कोंच जी द्वारा# मर्यादा# भास्कर सिंह माणिक,कोंच जी द्वारा# मर्यादा# Reviewed by प्रकाश कुमार on नवंबर 15, 2020 Rating: 5

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