सोमवार, 23 नवंबर 2020

कवि डॉ. प्रकाश मेहता द्वारा 'दीपावली' विषय पर रचना

*राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय 'बदलाव मंच'*
*साप्ताहिक प्रतियोगिता,*
*दिनांक-17 नवंबर,2020*
*विषय- "दीपोत्सव"*

*दिपावाली 'हेप्पी' कब होती है..?*

*जब मन में हो मौज बहारों की*
*चमकाएँ चमक सितारों की,*
*जब ख़ुशियों के शुभ घेरे हों*
*तन्हाई  में  भी  मेले  हों,*
*आनंद की आभा होती है* 
*उस रोज़ 'दिवाली' होती है।*

    *जब प्रेम के दीपक जलते हों*
    *सपने जब सच में बदलते हों,*
       *मन में हो मधुरता भावों की*
       *जब लहरें फ़सलें चावों की,*
       *उत्साह की आभा होती है* 
       *उस रोज़ 'दिवाली' होती है।*

*जब प्रेम से मीत बुलाते हों*
*दुश्मन भी गले लगाते हों,*
*जब कहीं किसी से बैर न हो*
*सब अपने हों, कोई ग़ैर न हो,*
*अपनत्व की आभा होती है*
*उस रोज़ 'दिपावाली' होती है।*

       *जब तन-मन-जीवन सज जाएं*
       *सद्-भाव  के बाजे बज जाएं,*
       *महकाएं ख़ुशबू ख़ुशियों की*
      *मुस्काएं चंदनिया सुधियों की,*
      *"प्रकाश" की  आभा होती है*
  *उस रोज़ 'दिपावाली' होती है।*

*डॉ. प्रकाश मेहता, बेंगलुरु*

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