बुधवार, 18 नवंबर 2020

विपिन विश्वकर्मा 'वल्लभ' जी द्वारा खूबसूरत रचना#

राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय बदलाव मंच साप्ताहिक प्रतियोगिता
दिनांक : १३/११/२०२०
विषय : बाल दिवस
 शीर्षक : मेरे बच्चे
मेरे बच्चे 
सुकुमार, सुकोमल, सुंदर होते है बच्चे,
तन के ही नही मन के भी,सच्चे होते है बच्चे।
हम है वर्तमान, तो भविष्य है ये बच्चे,
कोशिश है वर्तमान को सुदृढ़ बनाए,
ताकि बुलंदियो को भविष्य छू ले, 
आज की सोचें, दूरदर्शिता है इसी में ।

कोई किसी से कम नही सब में है दम,
चलो मिलकर चमकाएँ वर्तमान को हम,
अपने पर विश्वास रख उठाओ हर कदम, 
आप सर्वश्रेष्ठ हो, नहीं कोई किसी से कम,
मानव रुपी विकारों को करके खतम,
मिलकर चलो एक दूसरे के हमदम।

दुनिया को बदलने की रखते हो ताकत
महसूस करो अपनी वो ताकत,
साथ देगी आपका, सारी कायनात
न होने दो हावी कमजोरियों को ,
एक दूसरे का साथ देकर कर तो देखो
दुनिया उपर पाओगे खुद को।

आप में सफलता पाने की होड़ हो ,
लेकिन सबसे ऊँचा रखना चरित्र को;
जब भी हो परेशान या मन उदास हो,
मन डगमगाने लगे, कैसे नैया पार हो?
आँखे बंद कर, बुलंद करना खुदी को
सादर नमन 
*बदलाव मंच*


*दीपोत्सव*

दीप जलते हैं जलकर बुता जाते हैं,
आदमी की नियति को जगा जाते हैं ।
दीप की नाकदर न करो महि सुतों,
दीप भ्रमितों को मारग दिखा जाते हैं ।।

दीप कहते हैं, सुनते, समझते भी हैं,
कर प्रकाशित अमावस को हरते भी हैं ।
एक दीपक से रोशन हुआ है शहर,
हर शहर दीप रोशन तो करते भी हैं ।।

*विनय*
राम आ जाइए , राम आ जाइए ।
रावणों से सिया को छुड़ा जाइए ।।

लाख दीपक जलाएंगे हम नाम से,
धर्म का एक दीपक जला जाइए ।।

रास्ते अनगिनत हैं मेरे गाँव के,
हर डगर पर नजर आप आ जाइए ।।

फासले आपसे गर हुए हों कभी,
प्रेम का नेह बन्धन सिखा जाइए ।।

हर्ष है गम भी है जोड़ा-कफ्फन भी है,
आपका दिल करे जो उढ़ा जाइए ।।

ये मिलन की जो रुत रोज आती नहीं ,
हम चले जाएं न ! आप आ जाइए ।।

बुत बने हम खड़े थे खड़े ही रहे,
आश है आप मारग दिखा जाइए ।।

साम भी ढल रही रात होने को है,
नींद आने से पहले जगा जाइए ।।

राम आ जाइये, राम आ जाइए ,
धर्म का एक दीपक जला जाइए ।।


बहुत बहुत धन्यवाद
दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं
     
-विपिन विश्वकर्मा 'वल्लभ'

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