सोमवार, 9 नवंबर 2020

गीता पाण्डेय जी द्वारा खूबसूरत रचना#एकता#

*राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बदलाव मंच साप्ताहिक लघुकथा प्रतियोगिता*
 
          विषय:-"एकता,भाईचारा तथा देशप्रेम"
       उमेश और अब्दुल एक ही गांव के निवासी थे। दोनों ने 12वीं तक साथ साथ पढ़ाई की थी ।एक दिन उमेश ने अब्दुल से कहा- तुम लोग पाकिस्तान बंटवाने के बाद भारत में क्यों रह गए ? अब्दुल ने उत्तर दिया -वह तो नेताओं ने बंटवारा कराया था, प्रधानमंत्री बनने के लिए ।हम लोगों के पूर्वज इसी मिट्टी में पैदा हुए, स्वतंत्रता संग्राम में भी अपना खून बहाया । हम इस मिट्टी को छोड़कर कहां जा सकते हैं ? धीरे-धीरे दोनों पुलिस में सिपाही हो गए और अलग-अलग जिलों में उनकी तैनाती हो गई । एक बार रेल यात्रा में दोनों की मुलाकात बनारस में हुई। उमेश ने अब्दुल से कहा- थाने में जब कोई मुसलमान आता होगा तो तुम उसका पक्ष जरूर लेते होगे! अब्दुल ने जवाब दिया -मैं सही का पक्ष लेता हूं ,जिसका मुसल्लम ईमान न हो, वह मुसलमान क्या होगा ? चाहे ईद हो ,दिवाली हो या होली हो। हम सभी को भाईचारा बनाने के लिए तैनात किया जाता है और हम इन त्योहारों को ठीक से संपन्न कराने का पूरा पूरा प्रयास करते हैं। राष्ट्रीय एकता और देश प्रेम हर भारतीय का प्रथम कर्तव्य होना चाहिए।
           उमेश ने हां में सिर हिलाया और साथ-साथ गांव गए । छुट्टियां खत्म होने के बाद दोनों अपने-अपने तैनाती जिलों में चले गए। एक दिन अखबार में समाचार आया, अलीगढ़ में हिंदू- मुस्लिम दंगा हो गया ,जो विश्वविद्यालय के कुछ छात्र संगठनों द्वारा प्रायोजित था ।उसी में एक गोली उमेश को लग गई और उमेश शहीद हो गया।
       यह समाचार पढ़कर अब्दुल को बड़ा दुख हुआ। उसके मस्तिष्क में बार-बार उमेश के कहे वाक्य घूम रहे थे। वह सोच रहा था, हम पुलिस, सेना में देश प्रेम,भाईचारा और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए आते हैं, किंतु यह नेताओं का जाति-धर्म , वोट बैंक वाला सिलसिला कब तक हमारा बलिदान लेता रहेगा ? वह मौन होकर कुछ सोचने लगा था......।
                
गीता पाण्डेय
 रायबरेली,उत्तर प्रदेश

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