सोमवार, 9 नवंबर 2020

डॉ. रेखा मंडलोई ' जी द्वारा#देशप्रेम#

स्वरचित लघुकथा राष्ट्रीय- अन्तर्राष्ट्रीय बदलाव मंच साप्ताहिक- लघुकथा
स्वरचित लघुकथा- 
         शीर्षक- देशप्रेम
रीना अपने परिवार की बहुत लाडली बेटी थी। घर में दिन भर चहकती रहती थी। बड़ी हो जाने के कारण उसके पिता ने सोचा कि अब मुझे अपनी बेटी की शादी कर देना चाहिए। उसने अपने परिवार में इस बात की चर्चा की। वह चाहते थे कि उनकी बिटिया की शादी उनके दोस्त के बेटे से जिसका नाम रवि था हो जाए, जो सेना में पदस्थ था। दोनों परिवार इस रिश्ते के लिए तैयार हो गए और निश्चित समय पर दोनों की शादी कर दी गई। शादी के कुछ समय बाद रवि को अपनी सेवा हेतु पुनः निकालना पड़ा। रीना ने तिलक लगाकर अपने पति को खुशी खुशी विदा किया। रवि के जाने के बाद रीना ने सोचा मैं भी पढ़ी लिखी हूं, क्यों न एन डी ए की तैयारी कर लूं। समय का सदुपयोग करने के उद्देश्य से उसने पढ़ाई प्रारम्भ कर दी, उसकी मेहनत रंग लाई और वह एक काबिल सैनिक ऑफिसर बन गई। पति को यह बात पता चली तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह तो सोच रहा था कि रीना उसकी याद में रो रोकर दिन गुजार रही होगी। अपनी पत्नी के मन में समाहित देश भक्ति के भाव को देखकर उसकी आंखों में खुशी के आंसू झलक आए। दोनों आज भी देशप्रेम की भावना से परिपूर्ण होकर सेना में अपनी सेवाएं देते हुए देश सेवा कर रहे है।

डॉ. रेखा मंडलोई ' गंगा ' - इंदौर

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