सोमवार, 9 नवंबर 2020

डॉ. दीप्ति गौड़ जी द्वारा खूबसूरत रचना#भाईचारा#

बदलाव मंच लघुकथा प्रतियोगिता

भाईचारा
सचिन एक बहुत संकोची लड़का था । जब भी कुछ अभिव्यक्त करना चाहता कह नहीं पाता था । क्लास के लड़के उसे चिढ़ाते थे । रफीक भी मौका देख कर उसे चिढ़ाने की फिराक में रहता ।   एक दिन सचिन की। मां की अचानक बहुत तबीयत खराब हो गई । उन्हें खून की जरूरत थी । तब भी उसे किसी से मदद मांगने में संकोच हो रहा था । रफीक के पापा को किसी से  पता चला तो उन्होंने रफीक से कहा कि तुमने बताया नहीं । तब रफीक ने कहा कि सचिन किसी से बात नहीं करता है। तब पापा ने समझाया कि बेटा हमें अपने जीवन में भाईचारे से काम लेना चाहिए । सबका अपना अपना व्यक्तित्व होता है । रफीक को आज एक सीख मिली थी भाईचारे की ।
मौलिक स्वरचित

*रचनाकार*
डॉ. दीप्ति गौड़
विशिष्ट प्रतिभा सम्पन्न शिक्षक के रूप में राज्यपाल अवार्ड 2018 से सम्मानित
शिक्षाविद् एवम् साहित्यकार
ग्वालियर (म.प्र.)भारत

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें