मंगलवार, 3 नवंबर 2020

डॉ सुनील कुमार परीट जी द्वारा विषय 'नारी सुरक्षा' पर खूबसूरत रचना#

बदलाव अंतरराष्ट्रीय मंच को नमन 

 *।। नारी सुरक्षा ।।* 
मनुस्मृति में कहा गया है कि *यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः* और प्राचीन काल से इसको मान्यता भी मिली है। प्राचीन काल से ही भारत में नारी को आदर एवं सम्मान दिया जाता है। नारी को लक्ष्मी देवी का स्थान दिया जाता है। आज नारी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर क्षेत्र में काम कर रही है। पर आज नारी सुरक्षा पर ही अनेक सवाल उठ रहे हैं। क्या सच में ही पहुंच नारी सुरक्षित हैं? जिस घर में जिस समाज में नारी की पूजा होनी चाहिए वही और आज नारी असुरक्षित है। बहुत सारे लोग नारी की सुरक्षा के प्रति नकारात्मक सोच सकते हैं। यह नकारात्मक सोच रखनेवाले इस धरती पर उतरे हैं तो कहां से? नारी हमारी धर्म की, हमारी संस्कृति की मूल धातु है। जब हम नारी की सुरक्षा नहीं कर पाते हैं तो धर्म की रक्षा क्या करेंगे। जहां नारी का सम्मान नहीं होता है वहां आपकी शिक्षा और ये धर्म-कर्म सब निष्फल है। यह सर्वमान्य है कि आज मनुष्य आसमान से भी ऊपर उड़ रहा है पर नारी की सुरक्षा के विचार में मात्र बहुत नीचे गिर रहा है। महिलाओं को पुरुष के समान अधिकार दिए गए हैं पर उनका पालन किस हद तक हो रहा है यह सोचनीय बात है।

आज जो सामाजिक स्थिति है नारी के प्रति जो सोच है उसको क्या कहें? सब देख कर क्या ऐसा लगता है कि नारी सुरक्षित है? सच में नारी असुरक्षित है। तो इसके कारण क्या है।
 ** कारण :-* 
१. युवाओं में संस्कारों की कमी ।
२. दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति।
३. सामाजिक माध्यमों में बिखरता अश्लील चित्रण। 
 ४. नशे का दुष्परिणाम।
५. धार्मिक साधु संतों का दुर्व्यवहार।
६. धार्मिक कार्यक्रमों की ओर दुर्लक्ष।
७. मानसिक स्थिति में खिन्नता।
८. आत्मनियंत्रण की कमी।
मानसिक चंचलता।

 *निवारण :-* 
१. गिरते नैतिक मूल्यों की प्रतिष्ठापना हो नैतिक शिक्षा एवं संस्कार के तरफ ज्यादा ध्यान दिया जाए।
२. अत्याचारी बलात्कारियों के खिलाफ कठिन से कठिन कानून जारी करने चाहिए।
३. विपरीत परिस्थिति में नारे को आत्मरक्षा के लिए तकनीक सिखाने चाहिए।
४. नारी सशक्तिकरण के लिए ठोस कदम उठाया जाए।
५. धार्मिक संस्कारों पर जोर दिया जाए।

" नारी श्रद्धा है संस्कृति है
नारी का आदर सम्मान हो
नारी हमारी जीवनदायिनी है
नारी का कभी न अपमान हो ।।" 

 *डॉ सुनील कुमार परीट* 
बेलगांव कर्नाटक
वरिष्ठ हिंदी अध्यापक


स्वरचित मौलिक रचना सर्वाधिकार सुरक्षित

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