गुरुवार, 19 नवंबर 2020

कवि स्वप्निल जैन जी द्वारा रचना “अहिंसामयी दीपोत्सव”

बदलाव मंच को सादर नमन

शीर्षक:- अहिंसामयी दीपोत्सव
दिनांक:- 08-11-2020

------------------------------------------

दीपोत्सव का त्यौहार 
सभी के घर में खुशियां लाता है
मिलते हैं हम सब अपनों से
खुशियों की सौगात दिलाता है।

इस दीवाली हम सब
सिर्फ अपनों का ही ना ध्यान रखें
बल्कि उन सब छोटे-छोटे जीवों का भी सम्मान रखें

अपने घर को रात सभी
तुम दीपों से जगमग करना।

पर फोड़ पटाखें
नन्हे जीवों को अपनों से ना अलग करना।

घर घर जाकर अपनों के संग 
मीठा खूब खिलाना तुम
मित्र, सखा, परिवारजनों संग 
खुशियां खूब मनाना तुम।

पर नन्हें जीवों पर दया दिखाना
उन्हें जिंदा नही जलाना तुम।

एक पटाखा फोड़ सभी
तुम खुशियां खूब मनाते हो।

पर इस अनजानी नादानी में
लाखों जीव जलाते हो।

इस दीवाली में क्यों ना हम सब
एक प्रण को स्वीकार करें।
बाकी सारी खुशियां अपनाकर
पटाखों को इन्कार करें

जीव दया अंगीकार करें।
धर्म अहिंसा स्वीकार करें।
------------------------------------
रचना:- स्वप्निल जैन (छिन्दवाड़ा)
स्वरचित रचना

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें