मंगलवार, 17 नवंबर 2020

आरती तिवारी सनत जी द्वारा अद्वितीय रचना#

मंच नमन
बदलाव अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीय मंच १२/११/२०२०
प्रतियोगिता हेतु-
*विषय- दीपोत्सव*
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दिवाली पुरानी सनातनी परंपरारा..
रावण रूपी बुराई का अंत करके...
आज के ही दिन राजा राम‌ माता जानकी भ्राता लक्ष्मण चौदह बरस‌ का
वनवास ‌ पूर्ण कर अयोध्या नगरी वापस आए..
घर-घर दीप उत्सव दिवाली मनाई गई..
 अशोक के वृक्ष की पूजा करते हैं..
घर-घर पूरी हलवा पकवान बनते..
खील बताशे फुल पत्र पुष्प  माल्यार्पण
लक्ष्मी गणेश की पूजा होती..
व्यापारी बही खाते की पूजा करते..
दीपावली खुशियां मिठाई बांटी जाती..
पुरानी परंपराओं में पटाखा नहीं..
समय के साथ रुप बदला..
पटाखे प्रदूषण है फैलाते..
धीरे-धीरे यह विभीषिका का रूप ले लिया..
अब फिर से पुरानी परंपराओं की ओर
पटाखों पर बंदी लग गई है..
दिवाली केवल खुशी रूप में मनाई जाए..
देव दिवाली मनुज संग ..
सुख समृद्धि आशीष मांगे..
आओ हम सब भारतवासी..
लौट चलें  अपने सनातन परंपराओं की
ओर..
भारत विश्व गुरु बना है..
अपनी परंपरा संस्कारों के कारण..
आओ दीपोत्सव हम सब  मनाएं..
दिवाली और पटाखे..
दोनों में अंतर करके जीवन का..
अंतर्मन का भेद मिटाएं..!!!


आरती तिवारी सनत 
©® दिल्ली

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