शुक्रवार, 6 नवंबर 2020

कवयित्री डाॅ. ज्योत्सना सिंह साहित्य ज्योति द्वारा 'पतिदेव' विषय पर रचना

बदलाव अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय मंच

विधा:कविता,
विषय-पति देव 

कर सोलह श्रृंगार मांँ ,
मैं विनती यही करूं ,
चिरंजीव हो पिया हमारे ,
हर पल संग रहूं , 

उनसे ही खुशियां हैं सारी ,
तन में चलती स्वांस,
बिन उनके जग सूना लागे ,
मन में रहे न आस,
अमर करो मांँ संग हमारा
अटल करो विश्वास,
मांँ मैं विनती यही करूं,
चिरंजीव हो पिया हमारे ,
हर पल संग रहूं।।

कांटो भरी डगर फूलों-सी ,
लगती उनके साथ ,
संघर्षों में मुस्काती हूंँ ,
हाथों में जब हो हाथ, 
सात जन्म के आगे भी मांँ ,
दे दो यही सौगात ,
मांँ मैं विनती यही करूं,
चिरंजीव हो पिया हमारे ,
हर पल संग रहूं।।

डाॅ. ज्योत्सना सिंह साहित्य ज्योति, लखनऊ

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