शुक्रवार, 6 नवंबर 2020

कवयित्री आरती तिवारी सनत द्वारा 'चाँद' विषय पर रचना

मंच नमन बदलाव  अंतरराष्ट्रीय राष्ट्रीयता मंच
प्रतियोगिता..
4 नवंबर 2020 दिन बुधवार
विषय -चांद

*करवा चौथ का चांद*
*******************


हे चंद्र देव..
कार्तिक मास कृष्ण पक्ष..
चतुर्थी तिथि करवा चौथ व्रत..
सूर्योदय से सूर्यास्त तक..
निर्जला व्रत सुहागिनें रखतीं..
करके सोलह सिंगार..
पिया के नाम की चुनर ओढ़ी..
आज हर सुहागन..
नव दुल्हन हो या वृद्ध सुहागन..
सभी लगती नव दुल्हन सी..
आज धरा पर यह सौंदर्य देख..
अंबर से चांद शरमाया..
अपनी स्वच्छ चांदनी बिखेर दी..
देख अपूर्व सौंदर्य सुहागिनों की..
हाथों में मेहंदी रचाई..
भर भर हाथ कलाई भर चूड़ी..
मांग टीका बिंदिया सजाई..
नाक की नथनी कानों में झुमके
जुड़ा वेणी गजरा सजाएं..
पांव‌ में महावर लगाऊं...
पायल बिछुआ सुहाग ..
लाल सिंदूर से मांग भरूं..
पहन की सुहागिनों का जोड़ा..
पूजा की करवा थाल सजाएं..
करवा माता की पूजा करती..
गोरा पार्वती शिव का आशीष ले..
चंद्र देव को अर्घ्य देतीं..
दीप चंदन रोली से पूजा..
मांगे अपना अखंड सौभाग्य..
सुख समृद्धि खुशियां अपार..
चलनी से चंद्र देव का दर्शन..
पिया के हाथ से जल ग्रहण..
करवा चौथ का व्रत पूरा करतीं..
चंद्रदेव से मांगे सुख समृद्धि ..
अखंड लाल चुनरिया मांगे..
सजना की प्रीत मनुहार..
आज चंद्र देव देते दर्शन..
सुखी रहो सभी कल्याणी..
चंद्रदेव का मान बढ़ातीं..
भारत की तुम सती नारी...
संस्कार संस्कृति तुमसे है..
मैं चंद्रदेव करता हूं मान..
सावित्री सा वरदान देता हूं..
दूधो नहाओ पूतो फलो..
चंद्र की चांदनी सी तुम रहो..
अपने पिया के हित में..
मैं चंद्र देता हूं दर्शन..
अखंड सौभाग्यवती भव: ..!!





आरती तिवारी सनत
©® दिल्ली

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें