शुक्रवार, 6 नवंबर 2020

कवयित्री प्रतिभा द्विवेदी "मुस्कान" द्वारा 'मेरे हमसफ़र मेरे चाँद' विषय पर रचना

*मेरे हमसफ़र मेरे चाँद*

सजना के नाम की मेंहदी
सजना ने ही रचा भी दी...
मेरा चाँद मेरे करीब है!!!
मुझे और अब क्या चाहिए!!!

तेरा प्यार तेरी चाहतें ,,,
तेरा साथ मेरी जिंदगी!!!
तुम प्यार से लवरेज हो
मुझे और अब क्या चाहिए!!!

मैं संगिनी तेरी प्रिये ,,,
तेरे दिल पे मेरा राज है!!
मरने तलक यही अंदाज हो
मुझे और अब क्या चाहिए!!!

तूने लिखा जो मेरे हाथ पर
दिल में मेरे उकर गया!!!!
जीवन भर का अपना साथ है
मुझे और अब क्या चाहिए!!!

तेरी वफ़ा मुझे मिलती रहे
मैं भी टूट के तुझको चाहूँगी!!
हर जनम अपना साथ हो..
मुझे और अब क्या चाहिए!!!

मेरे हमसफ़र मेरे हमनवा 
तेरा प्यार मेरी हर खुशी!!!!
तुम मेरे हो बस मेरे प्रिये!!!
मुझे और अब क्या चाहिए!!!

तेरा साथ मेरी हर खुशी,,
तुझे उमर लगे उस चाँद की
तन-मन से तुम तंदुरुस्त हो!!
मुझे और अब क्या चाहिए!!

मेरा प्यार तूँ श्रृंगार तूँ,,
तेरी वफ़ा मेरा श्रृंगार है!!!
तेरी वफ़ा ही बस मिलती रहे
मुझे और अब क्या चाहिए!!!

मेरे हमसफ़र मेरे चाँद सुन
मेरी तुझसे इतनी इल्तिजा!!!
तेरे दिल में मेरी चाह हो ,,,,
मुझे और कुछ ना चाहिए!!!
मुझे और कुछ ना चाहिए!!!!

लेखिका-प्रतिभा द्विवेदी "मुस्कान" ©
सागर मध्यप्रदेश ( 04 नबंबर 2020 )
मेरी यह रचना पूर्णतः स्वरचित मौलिक व प्रामाणिक है सर्वाधिकार सुरक्षित है।

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