सोमवार, 9 नवंबर 2020

प्रकाश कुमार मधुबनी"चंदन" जी द्वारा खूबसूरत रचना#

*मंच को नमन*

*एकता व भाईचारा*
एक बार की बात है तीन दोस्त थे तीनो बहुत समझदार नटखट थे उनमें से तीनों का नाम क्रमश संजय साहेब सचिन था।साहेब एक मुसलमान लड़का था जबकि संजय व सचिन दोने हिन्दू परिवार से थे।
किन्तु तीनो का दोस्ती पूरे इलाके में प्रख्यात था। जब तीनो साथ में निकलते देखो तीनो चले आ रहे है सम्हल के रहना जरूर उधम करेंगे।
समय गुजरता चला गया। तीनो बड़े होते चले गए व एक दिन इलाके में दंगा फैल गया सभी हिन्दू मुस्लिम एक दूसरे को मारने काटते दिख रहे थे। तीन बड़े भी हो गए थे। संजय घर में बैठा हुआ था। तभी उसे चीखने चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। वह भागा भागा घर से बाहर निकल कर देखा तो पता चला। की आकिबा बस्ती में दंगा फैल गया है। और राजीव बस्ती में भी फैलने वाला है। सभी अपनी अपनी घर दुकान बंद करने लगे। तुरन्त एक हँसती खेलती बस्ती तबाह हो गई।
लोग एक दुसरे को मारते काटते निकल रहे थे। तीनो दोस्त के दूसरे को खबर करके इकट्ठा हो गए। तीनो घर घर जाकर सभी को बोले कुछ भी हो जाये बाहर के दंगाइयों को घुसने मत देना चाहे इसके लिए जान भी देना पड़े। हम सब एक है उधर सामने से भिड़ इस तरफ चली आ रही थी। लोगो का हुजूम था। समझ मे नही आ रहा था साहब पास के मस्जिद में से एक लाउडस्पीकर उठा लाया तीनो ने भीड़ को वही रोक दिया और कहा कृपा करके आप लोग वही रुक जाए व हमारे बातो को ध्यान से सुने यदि बाद में सत्य ना हो तो हम तीनों दोस्त में दोनों कौमो के लोग है फिर चाहे हमारी जान भी ले लेना। भीड़ बेकाबू था किन्तु तीनो की बाते सुनकर रुक गया। संजू बोला आप लोगो को कुछ लोग अपने फायदे के लिए लड़ा रहे है आप लड़ रहे है। जो भी दो आदमी आप दोनो कौमो में आपके नेता को आगे भेज दीजिये। हिन्दू के तरफ से अनुज व माधव आगे निकला। मुस्लिम के तरफ से अफरोज व फैजान बाहर निकले। तीनो दोस्तो ने पहले मुस्लिम लड़को को पूछा तुम बताओ मरने के पहले व मरने के बाद कौन से जगह जाओगे?
तुम दोनों अपने लोगो के साथ लाखों लोगों को जख्मी करके आये हो मार काट कर लेकिन क्या एक को भी जिंदा कर सकते हो बोलो? दोनो चुप हो गए। फिर हिन्दू लड़कों से पूछा। संजय बोला ये बता भाई गीता में किस चीज को व्यक्त किया गया है। लड़को ने उत्तर दिया।
सत्य न्याय व प्रेम की बात की गई है। संजय बोला क्या तुम लोगो ने बेगुनाहों को मारकर सही किया है। तुम जिन्हें मार रहे थे वो शिर्फ़ आत्मा थे। ना कोई हिन्दू ना मुस्लिम सभी धर्म केवल प्रेम सीखाता है है ना कि हत्या बेगुनाहों को मौत के घाट उतारने के लिए कहते है। अब बोलो फिर वही भीड़ से पूछा सभी सांत हो गए अपने आप में सब लज्जित थे। सभी ने तीनों लड़कों को उठाकर नारे लगाए व अपने अपने घर लौट गए। तब से लेकर सभी तीनो दोस्तों का आदर के नजरो से देखा। फिर कभी इलाके में दंगा नही हुआ व लोग मिलजुलकर रहने लगे।
*प्रकाश कुमार मधुबनी"चंदन"*

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