सोमवार, 12 अक्तूबर 2020

कवयित्री नेहा जैन जी द्वारा रचना “बाबा मैं तेरी बिटिया"

बाबा मैं तेरी बिटिया
आँगन की तेरी चिड़िया
डर लगता है मुझको 
छोड़ कर न जा तू अकेला
कितनी नजरें घूरे मुझको
इस जंगल में ,
थाम ले हाथ मेरा और बन जा मेरी ताकत
उड़ना चाहूं नील गगन में
अंतरिक्ष की भरूँ उड़ान
पर माँ कहती है
बाहर खतरा बहुत है बेटी
घर में ही तू सुरक्षित है
एक बात बताओ बाबा
क्यों इनसे सब डरते हैं
इनसे कुछ नही कहते है"पहरे तो इन पर हो"
मैं क्यों डरते डरते जीती हूँ
सफलता के आसमान को छूना
चाहू 
देश का अभिमान बनू मैं
आत्मविश्वास से भर दू सबको
ऐसी सूरत बनना चाहू
कैसे जंगली जानवर ये
जो रक्त हमारा पीते हैं
इंद्रधनुष से हमारे जीवन को
स्याह रंग देते हैं
आओ बाबा हम मिलकर सामना करते हैं
जन्म दिया जो तुमने मुझको
उसे सार्थक करते हैं
हम इनका विनाश करते हैं
कोई गलती नही हमारी है
ये मानसिकता की बीमारी है
बहुत हुआ अब  बहुत हुआ
जंग की अब हमने की तैयारी है
खूब पढ़ेंगें  खूब बढ़ेंगें
जी भर कर हर स्वप्न जिएंगें
 आँखों मे इरादे होगें
मन के पूरे हर वादे होगें।।

नेहा जैन

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस

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