रविवार, 25 अक्तूबर 2020

के.जी.गढ़वी जी द्वारा खूबसूरत रचना#

बाबुल का दुलार ममता का प्यार होती है
ये बेटियांँ ही परिवार का त्योहार होती हैं
यही सूरज की रोशनी चांँद की चांँदनी है
बेटियांँ ही उजालों की बोछार होती है
सबको सुख देती हैं किसी से ना कुछ लेती हैं
सुख की लकीरें, खुशियों का उपहार होती हैं
आंसू को पी  जाती है, गमों को खा जाती है
बेटियांँ तो अन्नपूर्णा का अवतार होती है
पेड़ों पर हरियाली है  फूलों में लाली  है।
उनका प्यार ही संसार की बहार होती हैं।
वो आए तो दीवाली, वो हंँसे तो रंगोली
जिस घर हो बेटी, लक्ष्मी उसी के द्वार होती हैं।
जो हाथ करे कन्यादान, वो है भाग्यवान।
बेटी बाप का गेहना, मांँ का श्रृंगार होती है।
    
-के.जी.गढ़वी

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