रविवार, 25 अक्तूबर 2020

चंचल हरेंद्र वशिष्ट,जी द्वारा नारी शक्ति एवं नवरात्रि पर बेहतरीन रचना#

बदलाव मंच,राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय 
साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु रचना(18 से 24 अक्टूबर,2020)
विषय:नारी शक्ति एवं नवरात्रि
             ' इस बार नवरात्रि में '
इस बार नवरात्रि में केवल इतना संकल्प उठा लेना
नवदुर्गा मत पूजना पर नारी अस्मिता बचाना तुम।

नहीं मान घटेगा देवी का जो चूनर लाल उढ़ाई ना 
अपनी हो या पराई नारी उसका चीर बचाना तुम।

व्रत,उपवास चाहे मत करना,प्रसाद भले न चढ़ाना
भूखे प्यासे गरीबों को भरपेट भोजन कराना तुम।

अष्टमी के दिन पूजन करके  मत कंजका जिमाना 
छोटी छोटी कन्याओं को बस दुष्कर्म से बचाना तुम

जगजननी का गुणगान तो कोई ज़रूरी काम नहीं
जन्मदात्री है जो तुम्हारी उसे कभी न सताना तुम।

देवी श्रृंगार चाहे मत करना भले मत मूर्ति सजाना
अर्द्धांगिनी को अपने मन के मंदिर में सजााना तुम।

बेटी और बहु तो साक्षात् लक्ष्मी का अवतार सदा से
लाड़ प्यार से इनको रखना जीभर स्नेह लुटाना तुम।

कभी न आए गाली में ,माँ-बहन,बेटी का नाम ज़बान पर
हर माँ बहन बेटी को बस प्रार्थनाओं में बुलाना तुम।

होता जहां सम्मान नारी का, वास वहीं त्रिदेव करें
इसीलिए हर  रूप में नारी का सम्मान बचाना तुम।

कुदरत ने विकराल रूप ले महामारी का रूप धरा
शक्ति की उपासना करना बस घर से बाहर न जाना तुम
राष्ट्र हित में बस इतना करना,घर से बाहर मत जाना तुम

हाथ जोड़ सत्कार करें और स्नेह भाव मन में रखें
प्रिय हो चाहे कोई कितना भी किसी उत्सव में मत जाना तुम

सफल होगी आराधना और पूरी होंगी तेरी मनोकामनाएँ 
कर्तव्य यह देशहित में दृढ़संकल्प हो निभाना तुम।

स्वरचित एवं मौलिक सृजन
चंचल हरेंद्र वशिष्ट, हिन्दी प्राध्यापिका,थियेटर प्रशिक्षक,कवयित्री एवं समाजसेवी
आर. के. पुरम, नई दिल्ली

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