रविवार, 18 अक्तूबर 2020

कवयित्री पूजा परमार सिसोदिया जी द्वारा रचना “गुजारिश"

बदलाव मंच को नमन

शीर्षक _ गुज़ारिश

हर ग़म में भी मस्कराऊ मैं
मुझको ऐसी आदत देदे ।

हर गलत को खुलके रोकू मैं
मुझको ऐसी बगावत देदे। 

बदल जाए मेरा वक़्त भी
मुझको ऐसी आहट देदे ।

खुद से ही बढ़ती  जाए जो
मुझको ऐसी चाहत देदे ।

रूठा हुआ है मुझसे जो
उस खुदा की बरकत देदे ।

भरी हो जिसमे अपनों की खुशियां
ऐसा मुझको पनघट देदे ।

तुझसे है गुज़ारिश सुन ज़िन्दगी
मुझको थोड़ी फुरसत देदे ।

ना दे सके इतना भी तो
मुझको खुद से रुखसत देदे ।

पूजा परमार सिसोदिया
आगरा ( उत्तर प्रदेश )
pujaparmar89@gmail.com

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