कवयित्री डॉ. अलका पाण्डेय जी द्वारा रचना “कलम ही पहचान"

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई 
१६/१०/२०२०
शीर्षक- कलम ही पहचान 

नित्य कलम करती है सृजन 
गीत लिखना कवि परम आनंद 

ह्दय में शब्दों का कमल खिलता 
खुशबू सारा जगत मोहित होता 

दिन दुखियों की कहानी लिखता 
नारी अपमान की व्यथा लिखता 

हास्य व्यंग्य की फुलझड़ीयां लिखता । 
विरह वेदना की पीड़ा और आसूं लिखता ।।

श्रृंगार के मधुर गीतों की झंकार लिखता । 
प्रणय निवेदन और प्रेम की परिभाषा लिखता ।।

अमन चैन की बांसुरी बचाता प्यार की गंगा बहाता । 

सद्भभावना की नैया लेकर जातपात का भेज मिटाता ।
सरकारों की तानाशाही पर भारी तीर चलाता ।।

प्रेमी प्रेमिका से मिलन के गीत गँवाता । 
समरसता  के पावन दीप पग  पग पर जलाता ।।

निश दिन माँ शारदा का अभिनंदन करता 
मेरी रचना से मेरी पहचान कराई 
शुक्रराना करता ।।

ह्दय को मेरे संवेदनाओं से परिचय कराया । 
जंग की वेदना को मेरी सखी बनाया ।।

दिल में कविता के भाव जगाये 
हर रचना मेरी पहचान कराई ।।
डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई 
मौलिक
कवयित्री डॉ. अलका पाण्डेय जी द्वारा रचना “कलम ही पहचान" कवयित्री डॉ. अलका पाण्डेय जी द्वारा रचना “कलम ही पहचान" Reviewed by माँ भगवती कंप्यूटर& प्रिंटिंग प्रेस मुबारकपुर on अक्तूबर 17, 2020 Rating: 5

कोई टिप्पणी नहीं:

Blogger द्वारा संचालित.