रविवार, 18 अक्तूबर 2020

कवयित्री रोशनी दीक्षित रित्री जी द्वारा रचना “जिंदगी"

*शीर्षक-ज़िंदगी

*ज़िंदगी आसान हो जाती,*
*जो हम भूलना सीख जाते।*
*रखकर किसी किताब में यादों को,फूलों की तरह*
*काश! फिर किताब को खोलना ही भूल जाते।*
*प्यार के इस तरख्त को, तूने कभी सींचा ही नहीं*
*और हमारे दिल में तेरी यादों का समुंदर कभी रीता ही नहीं।* 
*तुमने दफना दिया जिस एहसास को मैयत की तरह*,
*हम आज भी सज़दा करते हैं उसका,*
*इबादद की तरह*!!

*मेरी कलम से.......

रोशनी दीक्षित *रित्री*बिलासपुर छत्तीसगढ़

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