शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2020

कवयित्री शशिलता पाण्डेय जी द्वारा 'माँ दुर्गा' विषय पर रचना

माँ दुर्गा का षष्ठी रूप
*********************
माँ कात्यायनी की महिमा
*********************
नवरात्र की षष्ठी पावन दिवस, 
माँ कात्यायनी का पूजन-अर्चन।
माँ कात्यायनी की जयजयकार,
मनचाहा वर दे! माँ कात्यानी।
माँ कात्यायनी तू दयानिधान,
भगतों के दुख-संताप निवारिणी।
महिमा तेरी माँ अपरम्पार,
भक्तों को अर्थ,मोक्ष,धन प्रदायनी।
अतुलनीय प्रकाश से देती भर,
तू ही महिषासुर संहारिणी।
सारे जग में तेरी जयजयकार,
जन-जन की हर बिपतिहारिणी।
तू सबके सुख -संपति का आधार,
मुनि कात्यायन सुता सिंहवाहिनी।
तेरी महिमा गायें सारा संसार,
सुर नर,मुनिजन की बाधा निवारिणी।
जो तुझसे लगाता अपनी गुहार,
तू माता अपनें भक्तों विपदा हारिणी।
जीवन से सारी बाधा लेती हर,
जो रखता ऊँचे पद-प्राप्ति की ईक्षा।
तू झट देती भक्तों को इक्षित वर,
 आराधना,पूजा,अर्चन करे निशि दिन।
अलौकिक शक्ति से जाता भर,
तू माँ कात्यायनी,बनदुर्गा ब्रम्हवादिनी।
मेरी भी रोग,शोक,दुख बाधा हर,
तू रत्नप्रिया,सूरासुंदरी महिषासुरमर्दिनि।
******************************
स्वरचित और मौलिक
सर्वधिकार सुरक्षित
कवयित्री:-शशिलता पाण्डेय

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें