गुरुवार, 1 अक्तूबर 2020

कवि भास्कर सिंह माणिक कोंच जी द्वारा रचना “विषय -रक्त दान"

मंच को नमन
दिनांक 1 अक्टूबर 2020
विषय -रक्त दान

               दान
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रक्तदान से बढ़कर नहीं जीवन में है दान
एक बूंद रक्त की मित्र बचा सकती है जान

भाई रक्त अभाव में न कोई मरे यहां पर
फंस दलाल के चक्र न कोई लूटे यहां पर
रक्तदान कर बन जाइए प्रिय आप महान
रक्तदान से बढ़कर नहीं जीवन में है दान

रक्त दान से रक्त किसी का कभी घटता नहीं
रक्त समय से मिल जाए मरीज फिर मरता नहीं
मानव हो तो मानव की बन जाओ पहचान
रक्तदान से बढ़कर नहीं जीवन में है दान


ऐसा वैसा मत कीजिए झुकना पड़े तुम्हें
ऐसे पथ चुन लीजिए जहां नमन करे तुम्हें
कश्मीर से ले कन्याकुमारी एक  खानदान
रक्तदान से बढ़कर नहीं जीवन में है दान

हम असहाय के सहायक बने मन में लें ठान
गाए सारा जग मिल गली-गली हर्ष के गान
दीन दुखी की सेवा कर हम बचाएं इंसान
रक्तदान से बढ़कर नहीं जीवन में है दान
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मैं घोषणा करता हूं कि यह रचना मौलिक स्वरचित है।
           भास्कर सिंह माणिक, कोंच

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