गुरुवार, 1 अक्तूबर 2020

कवयित्री मधु भूतड़ा जी द्वारा रचना “विषय - गाँधी जी, अहिंसा और प्रेम"

*नमन मंच*

*दिनांक - 01.10.2020*

*विषय - गाँधी जी, अहिंसा और प्रेम*

*शीर्षक - एक मुलाकात गाँधीजी के साथ* -

महात्मा गांधी महान थे, उनके नाम, चित्र और चरित्र के बारे में जितना भी कहेंगे, कम होगा। 

ब्रिटिशों से हमें कुछ सालों में ही आज़ादी मिल जाती अगर गरम पंथियों को समर्थन किया होता,परन्तु ये तो गाँधी जी की दृढ़ शक्ति थी कि हम अहिंसा के पथ पर ही चलेंगे, तुम एक गाल पर थप्पड़ मारोगे तो हम तुम्हारे आगे दूसरा गाल रख देंगे, नमक सत्याग्रह आंदोलन में हाथ में नमक लेकर सौगंध ली और अंग्रेज हमें मारते गए, इतने बड़े शांति के दूत हमें कहाँ से मिल पाते, इसीलिए हमें सिर्फ 50  साल ही तो लगे आज़ादी हासिल करने में,धीरे-धीरे नतीज़ा यह हुआ कि हम भी शांति के परिंदे बन गए, पड़ोसी देश हमें कायर और दब्बू समझने लगा, लेकिन *वर्तमान समय में की गई एक सर्जिकल स्ट्राइक ने हमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस को याद दिला दिया, और उनके कहे गए कथन कानों में गुंजन करने लगे, "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।"* 

*आज तक किसी भी देश को जीतने के लिये युद्ध ही किया जाता रहा है, पर हमारा नरम खून ही कहिये कि आज भी हम युद्ध नहीं बुद्ध का आह्वान करते हैं।* गांधीजी की यह महानता ही तो है कि हिन्दुस्तान के दो टुकड़े हुए, भारत और पाकिस्तान। उनकी दूरदृष्टि ही तो थी कि पाकिस्तानी गरम खून को सम्भालना कठिन है, इसलिए इन्हें हटा दिया जाए और भारत को अमन चैन से जीने दिया जाए, इतनी महान सोच! समझने की जरूरत है।

 हमें तो सर्वदा प्रातःकाल उनको नमन करना चाहिए कि उन्हीं की वजह से हम खुली हवा में साँस ले रहे हैं।हर नोट पर गाँधी, इनकी वजह से रिश्ते बनते हैं, वो अलग बात है कि टूटते भी इनसे ही हैं, सोचो सिर्फ चित्र में इतनी ताक़त है तो वो स्वयं कितने शक्तिसंपन्न रहे होंगे। भ्रष्ट नागरिक इनके नाम की दुहाई देकर स्वयँ को किसी भी आरोप-प्रत्यारोप से बरी कर सकता है। *देश के जन-जन के हृदय में गाँधी के प्रति अगाध प्रेम है*,यह प्रेम इतना बढ़ गया है कि स्वरूप बदल गया है, गरीबों का शोषण होने लगा है भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुँच गया है, भाई-भाई का दुश्मन बन गया है, दोस्ती-यारी दांव पर लगने लगी है, राजनेता झूठे वादे करके चकमा देने लगे हैं, सड़क के चौराहों पर खड़ी यातायात पुलिस आपकी खातिरदारी करने से कहीं नहीं चूकती है, *क्या नेता, क्या डॉक्टर, क्या वकील, क्या हवलदार सभी लगे पड़े हुए हैं इनसे प्रेम निभाने में। जिधर देखो उधर गाँधी जी के लिए प्यार बेशुमार!* 

इनके नाम की महिमा अपरम्पार! इनके नाम से पकड़े जाने वाला अपराधी इन्हीं के नाम से छूट जाता है। इनके नाम से प्रोमोशन मिलता है तो इनके नाम से रुक जाता है। सत्ता प्राप्ति के लिए जो सतत् प्रयत्नशील और संघर्षरत रहे हैं, वो इनके नाम की माला जपते रहते हैं।

 स्वच्छता आंदोलन, प्लास्टिक बैन आन्दोलन, मेक इन इंडिया जैसे अनेकानेक अभियान आप की ही तो महिमा का बखान करते हैं। सिद्धांतों से जुड़ी कहानी बड़ी सरल है पर निभाने में बड़ी कठिन। आपके इतने प्रयासों के बाद भी आज़ादी उपरांत लोकतंत्र को राजतंत्र बना कर छोड़ दिया, गाँधी जी को अब ख़ुद पर ही लज्जा आने लगी है, सरकारी कार्यालयों में उनके चित्र के आगे जो लेन देन हो रही है, उससे पीड़ा का अनुभव होने लगा है, गाँधी जी का हृदय व्यथित हो उठा है, क्या इनलोगों के लिए जिया मरा, क्यों देश के टुकड़े किए, क्यों नंगे बदन आज़ादी के लिए गली-गली शहर-शहर डोलता रहा, ब्रिटिश राज में ही ठीक थे, ऐसी दुर्दशा देख कर निश्चित ही उनके मन से निकलता ही होगा हे राम! 

अब वो सही हाथों में बागडोर सौंप कर पूर्ण मुक्ति की ओर प्रस्थान करना चाहते हैं। अपने नाम, चित्र और चरित्र में बदलते भारत की तस्वीर देखना चाहते हैं।

*151 वीं गाँधी जयंती में यहीं हैं उनकी आकांक्षा।*
*गाँधीगिरी से मुक्ति और बस पूर्ण विराम।*

*मधु भूतड़ा*
*गुलाबी नगरी जयपुर से*

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