रविवार, 4 अक्तूबर 2020

लेखिका माधवी गणवीर जी द्वारा 'जय जवान जय किसान' विषय पर रचना

नमन मंच
*बदलाव अंतरराष्ट्रीय - राष्ट्रीय मंच* 
साप्ताहिक प्रतियोगिता
विषय - *जय जवान जय किसान*

मां भारती के इस पावन धरा पर अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया जिन्होंने अपने आचरण ,कर्तव्य और परिश्रम से ना केवल देश का मान सम्मान बढ़ायां, बल्कि आने वाले पीढ़ियों के लिए भी एक नई मिसाल कायम की, उन्हीं में से एक थे महापुरुष "लाल बहादुर शास्त्री" ।
ईमानदार, दृढ़ संकल्प, परिश्रमी उच्च आदर्शों पर विश्वास रखने वाले निरंतर सजग व्यक्तित्व के  धनी, शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था, पिता शारदा प्रसाद,रामदुलारी माता के दुलारे, शास्त्री जी भारत के एक महान पुत्र कहलाए।काशी विद्यापीठ से उच्च शिक्षा प्राप्त कर शास्त्री की उपाधि पायी,जिन्होंने हमारे देश की पूरी लगन और समर्पण के साथ सेवा की सादगी,सत्य निष्ठा और साहसिक नेतृत्व के परिचायक, जिन्होंने सफलतापूर्वक कार्यान्वयन सुनिश्चित किया तथा जिन नैतिक मूल्यों को स्थापित किया वह आज भी प्रासंगिक है और अनुकरणीय भी।
    समाज और देश की प्रकृति के प्रवर्तक समाज के लिए उनका दृष्टिकोण आज भी किसान और जनमानस के लिए प्रेरणा स्रोत है विषमता के विकट  दौर में वह जन समुदाय को अपनी सूझबूझ से विकास और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित करते रहें, खाद्यान्न की कमी पर एक वक्त का भोजन त्यागने की अपील की। किसानों के पक्षधर, हौसला बढ़ाने के लिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल किया। पिछडे  वर्गो  के हित में कार्य किए,देश की एकता अखंडता बनाएं रखने में, सुरक्षा और संप्रभुता से कभी भी समझौता नहीं किया ।उनका यह दृढ़ निश्चय व्यक्तित्व 1965 युद्ध में देखने मिला पाकिस्तान के आक्रमण पर  शास्त्री जी ने सैनिकों को प्रेरित प्रोत्साहित करते रहें,  उनके प्रेरणा भरे वाक्य "जय जवान*जय किसान*  का नारा दिया, बल्कि सेना को स्वतंत्रता पूर्वक साहस वीरता के साथ देश के स्वाभिमान की रक्षा के लिए खुली छूट दे दी। उसका नतीजा हमारी सेना ने पाकिस्तान की सेना को बुरी तरह परास्त कर दिया। वहीं शांति समझौते में ताशकंद से निर्जीव शरीर ही वापस आया,आत्मा आखरी सांस तक देश हित में गई। देश को आत्मनिर्भर बनाने और हरित क्रांति लाने, श्वेत क्रांति  में  शास्त्री जी का बेहद योगदान रहा। उनका जो नारा है, आज भी जन- जन में जोश और उत्साह भर देता है।
सबसे बड़े लोकतंत्र का कुशल नेतृत्व कर, मिसाल पेश करने वाले शास्त्री जी ने  रेल मंत्री, परिवहन, संचार मंत्री, वाणिज्य और उद्योग, गृह मंत्री और बिना विभाग के मंत्री पद पर भी रहे,सादगी,देशभक्ति और ईमानदारी के लिए 1966 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित, देश के बहादुर " लाल बहादुर शास्त्री को जयंती पर शत- शत नमन है, शत- शत नमन है।

*देश की आन,बान,शान थे शास्त्री  जी*
*सरल, सहज,सादगी पसंद थे शास्त्री जी*।

*माधवी गणवीर*
राजनांदगांव,छत्तीसगढ़

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