रविवार, 4 अक्तूबर 2020

कवि प्रकाश कुमार मधुबनी"चंदन" जी द्वारा रचना “गांधी व अहिंसा”

*स्वरचित रचना*

 *गांधी व अहिंसा* 

 *प्रतियोगिता हेतु।* 

4/10/2020
मैं प्रकाश कुमार मधुबनी"चंदन" सर्वप्रथम बदलाव मंच को नमन करता हूँ। ततपश्चात मैं माँ शारदे को नमन करते हुए आप सभी को नमन वंदन करता हूँ। मित्रों जैसा कि आप जानते है आज मैं आप सभी के समक्ष आज जिस बिषय पर बात करने जा रहा हूँ वह सम्पूर्ण विश्व के लिए महत्वपूर्ण है।गुजरात के पोरबंदर में २अक्टूबर १८६९  को एक बालक का जन्म हुआ जिसका नाम मोहन दास पड़ा था पूरा नाम मोहन दास कर्म चन्द्र गांधी मिला।उनके पिता का नाम कर्म चंद था।वो पेशे से एक जाने माने वकील थे।किसको पता था कि उनका बेटा देश का नही विश्व के लिए एक उदाहरण बन जायेगा।कहा जाता है कि उनके पिता के पास सब चीजें दैनिक जीवन जीने के लिए आवश्यक होता है वो सभी सुख सुविधा उनके पास थी। किन्तु किसी ने जो सोचा नही था वो उन्होंने कर दिखाया। १९१९में दक्षिणी अफ्रीका से आने पर वो एक सबसे बड़े चेहरा में से एक थे।उन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व जीवन लगा दिया। विशिष्ट रूप से मुख्य बात है की महात्मा गांधी को महात्मा उपनाम देने वाले रवींद्र नाथ टैगोर ने दिया जिसको महात्मा गांधी ने सार्थक करके दिखाया।महात्मा गांधी एक नेता के साथ एक उम्दा लेखक,एक समाज सुधारक,एक क्रांतिकारी साथ ही एक उम्दा कोच भी थे।१९१९ से तक १९५७ का दौर गांधी दौर के रूप में जाना जाता है।जिसमें एक आवाज पर लाखो लोग अपना सर्वस्व बलिदान करने के लिए तैयार हो जाते थे। गांधी जी के जन्मदिवस के अवसर पर इसे अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में जाना जाता है।गांधी जी एक बेहतरीन वक्ता भी थे।सबसे महत्वपूर्ण बात उनके जीवन में सबकुछ होते हुए शिक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन था।
जब बच्चे बड़े होते है तो वो भौतिक सुख सुविधा में खो जाते है और उनके शिक्षा का उद्देश्य भी सुख सुविधा ही होता है किंतु महात्मा गांधी एक ऐसे व्यक्ति थे जो इसके विपरीत उनका सुख सुविधा को छोड़कर युवावस्था में आते ही भारत के आजादी के लिए मैदान में कूद पड़ना सबसे एहम था। वो भारत के कोने कोने में अंग्रेजी हुकूमत के लिए एक एक कर जड़े खोदते चले गये। उन्होंने विस्व को मानवता के सबसे बड़े हथियार व उसके सबसे बड़े शक्ति उसके आत्मविश्वास से परिचय करवाया जिसका नाम सत्य व अहिंसा है। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश के रास्ट्र के निर्माण में लगा दिया। उनका जीवन के लिए संघर्ष को टक्कर देना व विश्व को जीने का सच्चा अर्थ बताना अद्वितीय रहा। उन्होंने हर वर्ग के लिए शिक्षा,स्वास्थ व स्वच्छ जल स्वच्छ वातावरण प्रदान करवाने के लिए पड़ताल किया।उन्होंने सदा अहिंसा मानवता के लिये आदर्श व वरदान माना।गांधी जी ने माना कि यदि मानव सत्य के मार्ग पर चलने का प्रयत्न करें तो वह देश समाज के लिए सदैव अंत में विजय प्राप्त करता है। आज विश्व उनके विचारों का जितना शोध करता है उतना गांधी जी से सम्बंधित नया नया वाक्या पता चलता है। उनका हमेशा मानना रहा भारत तभी पृर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनेगा जब भारत के लोग स्वयं अपने हाथों से प्रयास करेंगे। लोग तभी बेहतरीन जीवन स्तर जी सकते है जब वो अपने हाथों से काम करेंगे।जब पूरा भारत मिलकर एक साथ गरीबी भुखमरी जात पात आदि व बाल विवाह आदि प्रथाओं से पृर्णजोर लगाकर इन्हें समाप्त कर दे।
जब भारत में साफ सफाई व रोजगार का अवसर प्राप्त हो जब भारत के किसान मजदूर वर्ग को मजबूत स्थिति में लाया जाये। भारत के सभी धर्म समुदाय वर्ग के लोग एक साथ मिलकर कार्य करे। जब भारत में एकता मानवता अखंडता आदि का बोलबाला हो। जब देश का हर बच्चा अपना नैतिक भाव जागृत करने का प्रयत्न करें।जब भावनाओं से ऊपर उठकर भारत का हर तंत्र पृर्ण रूप से अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह करे। आज विश्व को उनके विचारों को अपने जीवन में लाना चाहिये। मैं अंत में बदलाव मंच का धन्यवाद करता हूँ व आप सभी का धन्यवाद करता हूँ जो आप सभी ने मुझे उत्साह वर्धन किया जिससे मैं अपने मन के विचार को आपके समक्ष रख सका।

प्रकाश कुमार मधुबनी"चंदन"
(लेखक,कवि,गीतकार)

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