शुक्रवार, 2 अक्तूबर 2020

कवयित्री डॉ ज्योत्सना सिंह जी द्वारा रचना "संकल्प से उत्सव की ओर"

"संकल्प से उत्सव की ओर"

दो अक्टूबर धन्य दिवस यह भारत के इतिहास का, 
गांधी,शास्त्री दो मूर्त रूप थे मां भारती के विश्वास का,
सत्य अहिंसा कर्मशीलता शांति के संवाहक थे,
नमन उन्हें है भावपुष्प से यह पर्व है हर्षोल्लास का।।

आप सभी को इन्हीं पंक्तियों के साथ आज के इस राष्ट्रीय पर्व की ढेर सारी शुभकामनाएं ,
          विचार का प्रश्न है कि ;जिन दो महान विभूतियों के जन्मदिवस का हम पर्व मना रहे हैं क्या सही अर्थों में हम उन्हें याद कर रहे हैं ?या सिर्फ उनकी तस्वीर पर फूल माला चढ़ा कर, चंद पंक्तियां कह कर मात्र फर्ज अदायगी कर रहे हैं? क्या आज हमारा उत्तरदायित्व यह नहीं हो ता है कि हम महान विभूतियों के बताए मार्ग पर चलकर, उनके दिए संदेश को जीवन में धारण कर समाज और राष्ट्र को उन्नत शिखर पर ले जाएं,किंतु हम ऐसा नहीं कर रहे हैं।
        अंतर्मन व्याकुल है, और यह सब आडंबर या ढोंग सा प्रतीत होता है, यह मंच नारी सशक्तिकरण का मंच है ,और आज समाज की तमाम घटनाएं नारी को निरीह सिद्ध कर दे रही हैं, ऐसे में क्या अंतर्मन आंदोलित नहीं होता?  अस्थिर नहीं होता .....?और मेरा मानना है कि जब तक मन शांत एवं स्थिर ना हो तब तक कोई उत्सव कोई पर्व मनाना सिर्फ स्वयं को धोखा देना है। ऐसे में हम महात्मा गांधी जी जिन्होंने सत्य अहिंसा का पाठ पढ़ाया एवं शास्त्री जी जिन्होंने कर्म शीलता का मार्ग दिखाया का जन्मदिन मना कर उन्हें सच्चे भाव पुष्प समर्पित नहीं कर सकेंगे। अपने लेख में आज मेरी लेखनी आवाहन के अतिरिक्त कुछ नहीं लिख पा रही,........। क्योंकि बाकी कुछ भी लिखना स्वयं को धोखा देना , भेड़ चाल चलना और चापलूसी करना जैसा प्रतीत हो रहा है ।यदि आप सभी सहमत हैं तो आज के इस गांधी एवं शास्त्री जी के जन्मदिवस को एक संकल्प की तरह मनाइए। अन्यथा मेरा "2अक्टूबर जन्मोत्सव" का लेख इस प्रकार है इसे पढ़कर आनंद लीजिए और आगे बढ़ते जाइए

      ( महात्मा गांधी एवं शास्त्री जी भारत के दो ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने 2 अक्टूबर को जन्म लेकर इस पावन धरती को धन्य किया ।उन्होंने एक लाठी एक धोती से अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलकर क्रूर अंग्रेजों को भारत से भगा दिया और संपूर्ण भारत को एकता के सूत्र में पिरो कर राष्ट्रपिता कहलाए। वहीं दूसरी ओर शास्त्री जी शांत ,सौम्य व्यक्तित्व के धनी हरित क्रांति के संवाहक, जय जवान जय किसान का नारा लगाने वाले भारत को उन्नति पथ पर अग्रसर करने वाले हमारे देश के द्वितीय प्रधानमंत्री के पद को गौरवान्वित किया और हम सभी के लिए एक स्वच्छ ,सशक्त आचरण का उदाहरण प्रस्तुत किया ।आप सभी को इनके जन्मदिवस की हार्दिक बधाई धन्यवाद)
  डॉ ज्योत्सना सिंह "साहित्य ज्योति"लखनऊ

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